ठाकुर का न्याय

ठाकुर का न्याय !
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एक गांव में एक ठाकुर था। वो उस गांव का सरपंच था। एक दिन उसका एक दोस्त आया चुपके से रात में। बताया कि भाई मैंने बहुत घपला किया है। कई सारे लोग हैं आपके जानने वाले भी उसमें, अब क्या करूँ। ठाकुर ने कहा: बगल के गांव भाग जा फिलहाल। मैं बात कर लूंगा उस गांव के ठाकुर से। बस दिखना मत। सबको दिखाऊंगा की तुमको पकड़ने की कोशिश कर रहा हूँ। एक दो महीने बाद बुला लूंगा। गांव की और मेरी इज्जत भी बच जायेगी। चिंता ना कर। ये सब होते रहता है। तू छोटा भाई है मेरा।

चिल्ल मार अब !
जा हुक्का ला!

हां सुबह सूरज ढलने से पहने निकल जाना। समझे !

ये सारे पात्र काल्पनिक हैं। इनका 11 हजार करोड़ से कोई लेना देना नहीं है। डायमंड से तो बिल्कुल भी नहीं।

बोलो जय मोदी!
बोलो जय माल्या!
बोलो जय चोकसी !

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