गिद्धों का ज़मीर

गिद्धों का ज़मीर
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हाथों में कैमरा लेकर,
जुबान पर जमीर लेकर,
समाज के खेवनहार,
उम्मीद का दीया जलाते थे।

आज तड़के, दिनदहाड़े,
सैकड़ो कैमरे के साथ,
एक लड़की को नोचते,
गिद्धों का झुंड देखा ।

गिद्ध, कभी विलुप्त नहीं होते,
वो, अपना आकार प्रकार बदलते हैं।
मैंने देखा है उन्हें,
कभी सफेद कुर्ता पायजामा,
कभी खाकी वर्दी और बन्दूक,
कभी हाथों में हथौड़ा और सामने कठघरा,
या स्टूडियो, सड़क पर कैमरे के साथ,

गिद्ध जिंदा रहते हैं।
बस लाशें बदलती हैं!

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