तुम मीडिया वाले हो.

तुम मीडिया वाले हो.
सत्ता के जुमले पढ़ते हो.
भाषा इनकी अपनी गाथा गढ़ते हो.
इनकी गलियों में चरते हो.
इनकी काली करतूतों को,
श्वेत रंग करते हो.
वेश्यालय में बैठ कर,
कुंवारा दंभ भरते हो.
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(अरुण भारती ‘चिंतित’)

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