कांग्रेस, भाजपा और अन्य

कांग्रेस और अन्य
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संतरे 1925 से लगे हुवे हैं। उनकीं सीट बढ़ी देश को बांटने के बाद, बाबरी मस्जिद गिराने के बाद।1984 में इनकी संसद में 2 सीट थी। 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा, देश व्यापी दंगे हुवे, देश हिन्दू मुस्लिम में ऐसा बंट गया जैसा 1947 में हुआ था। कांग्रेस वोट की राजनीति में व्यस्त थी, उन मामलों को और ताकतों को कुचला नहीं, मसला नहीं। नतीजा है कि वही धार्मिक उन्मादी और कम्युनल साँप सत्ता में है। ये 30 साल पहले भी आ गए होते तो गाय, गोबर की राजनीति होती।

पंडित नेहरू ने IIT, IIM, IISc, NTPC, Steel Plants स्टार्ट किया, PV नरसिंहा राव और मनमोहन सिंह जी ने इकोनॉमी को ग्लोबल मार्केट के लिए खोला, संजय गांधी ने मारुति कार का सपना देखा, राजीव गांधी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी लेकर आये, UPA ने Right to Education, Right to Information, UID, MNREGA लायी. गिनती की जाये तो कांग्रेस और पिछली सरकारों ने हजारों हजार योजनाओं का कार्यान्वयन किया है। नवोदय विद्यालय का सपना राजीव जी का था, जिसने लाखों गरीब छात्रों को उत्तम शिक्षा और अवसर प्रदान किया। जिसमें से अनेकों प्रशासनिक सेवा से लेकर कई गणमान्य व्यक्तियों में आते हैं। ऐसे अनेकों कार्यक्रम और प्रावधान हैं। आज की सरकार, जिसका नामकरण और जोड़ घटाव करके जमीन से कोई ताल्लुकात न रखने वाली और फेंकने वाली सरकार अब मलाई खा रही है।

भ्रष्टाचार भी हुआ।नेता लोग राजनीति में सेवा के लिए नहीं मेवा के लिये आते हैं। राजनीति एक व्यापार हो गया है। पहले ही करोड़ो देना पड़ता है। तब जाकर टिकट मिलता है। फिर करोडों खर्च करिये चुनाव से पहले। जीत गए तो मालामाल नहीं तो फिर से शुरुआत ऐसे ही करना है।

विरले ही ऐसे नेता हैं जिन्होंने अपार धन नहीं बनाया है। उनका नाम अमर हो जाता है। खून की राजनीति भी करते हैं लोग। लेकिन जिस पार्टी की विचारधारा ही नफरत और भेदभाव पर टिकी हो उससे मेरी कोई सहानुभूति नहीं।

कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया? वो 70 साल थी कहाँ? पहला प्रोपगंडा तो यही है। कांग्रेस तो 1980 में ही कमजोर हो गयी थी। तब से लगभग खिचड़ी सरकार ही रही हैं। बीच में अटल जी कि सरकार रही है। लेकिन अपनी दुकान चमकाने के लिये नाज़ी जर्मनी को अपना गुरु द्रोणाचार्य मानने वाले और गॉस्पेल से प्रभावित लोग हर तरह का वही हथकंडा अपनाते है और कांग्रेस को बाल्टी भर पानी पी पी कर गालियाँ देते हैं।

इनके सँस्कार ऐसे हैं कि जिसने अपने को खोया, यहाँ की मिट्टी में घुल मिल गयी उस विधवा को आज भी गाली देते हैं। मजबूरी या त्याग जो भी कह लो इतिहास गवाह है कि कुर्सी और गद्दी के लिए लोग अपने स्वजनों तक कि हत्या कर देते हैं और एक औरत ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया।

मुझमें इतना कांग्रेसी है और रत्ती भर भी भाजपा नहीं है।

यह सरकार, इसके आका और इनके भक्त हद्द दर्जे के जाहिल, अपढ़ और बेशर्म लोग हैं।आता जाता कुछ नहीं हवाबाजी भरपूर !

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अमीरी और गरीबी: कोरोना के समय

यही अमीरी और गरीबी का अंतर है।

इसे ही क्लास वॉर कहते हैं।

यही संसार का सत्य है!

विश्व में हर जगह सरकार यही करती है,

कि गरीब के लिये कुछ नहीं करती है !

महाभारत और रामायण

महाभारत और रामायण
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महाभारत कम से कम 8 बार देख चुका हूँ। अभी फिर देख रहा हूँ। इतना जबरदस्त अभिनय, ऐसे शब्द, ऐसी कहानी। शायद ही इतना जबरदस्त कोई सीरियल हो इस दुनिया में। #GameOfThrones भी पश्चिमी देशों का महाभारत सा लगता है। वह भी अद्भुत है। लेकिन महाभारत में सुंदरता है, शालीनता है और शिक्षा है।

समय के माध्यम से महाभारत का सार बताया गया है। यदि किसी ने महाभारत नहीं पढ़ी है और वह केवल समय द्वारा कहे गए उस 2 से 3 मिनट के शब्दों को समेट कर रख ले तो वह कई महाकाव्यों का सार होगा।

महाभारत को मैं 70 बार देखूँ तब भी उतना ही ताजा लगेगा। ऐसा लगता है कि सारे चरित्रों को जीवित और जीवंत करने के लिऐ ही इन कलाकारों का जन्म हुआ हो। नीतीश भारद्वाज जैसा कृष्ण न होगा, फिरोज खान जैसा अर्जुन न होगा, मुकेश खन्ना जैसा भीष्म न होगा, पुनीत इस्सर जैसा दुर्योधन न होगा, पंकज धीर जैसा कर्ण न होगा, प्रवीण कुमार जैसा भीम न होगा, गिरिजा शंकर जैसा धृतराष्ट्र न होगा, सुरेंद्र पाल जैसा गुरु द्रोणाचार्य न होंगे और रूप गांगुली जैसी द्रौपदी न होगी।

धृतराष्ट्र और समय का अद्भुत किरदार है। गुफी पेंटल जैसा कोई शकुनि न होगा, न होंगे वैसे गुरु द्रोण, विदूर और ऐसे सैकड़ों कलाकार। महेंद्र कपूर की आवाज में महाभारत आपके मनः मस्तिष्क तक समा जाता है।

महाभारत कोई धर्म युद्ध नहीं है। वह छल प्रपंच और लोभ, मोह, अहंकार की कहानी है। सबने छल किया। और सारे छल का सूत्रधार कृष्ण लगे। एक तरफ कृष्ण हैं तो दूसरी तरफ शकुनि। महाभारत युद्ध में पांडवों ने कौरवों के लगभग सभी महायोद्धाओं को छल कपट से मारा। सबके मृत्यु के जिम्मेदार कृष्ण लगे। बिना छल के द्रोण, भीष्म, कर्ण और दुर्योधन का अंत असंभव था और पांडवों की जीत भी।

सब बातों का एक ही सार है कि युध्द में विजय ही प्रमुख है और इसके लिए रणभूमि में नियमित नियमों का उलंघन भी धर्मयुक्त कार्य है।

वत्स तुम कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही महाभारत का संदेश है !

रामायण मैंने कम देखी है। रामायण बहुत मेलोड्रामा से भरपूर है। रामायण संगीतमय है। इतना आदर्श है कि यकीन नहीं होता। लेकिन उसमें में भी अद्भुत कलाकार हैं। क्या डायलॉग बोलते हैं। क्या शब्द चयन है। एक से बढ़कर एक। अरुण गोविल जैसा कोई राम न होगा। अरविंद त्रिवेदी जैसा कोई रावण न होगा। मेघनाद, हनुमान, कुम्भकर्ण, लक्ष्मण, कैकयी, मंथरा। ऐसे अनेकों पात्र हैं जो ताउम्र मुझे याद रहेंगे।

आज के युग से यदि तुलना करें तो रामायण आशिकी और हम साथ साथ हैं जैसा म्यूजिकल हिट है तो महाभारत गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसा एंगेजिंग है !

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कोरोना कविता

कोरोना कविता
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अपार्टमेंट महँगा, बस्ती सस्ती,
बस इतनी सी कहानी है।

पैसे वाला एयरलिफ्ट होगा,
मजदूर को जान गंवानी है।

अमीर ने खाया दुर्लभ जीव
गरीब कीमत चुकायेगा,

महलें, अट्टारी रहे सुरक्षित
झोंपड़ी कोरोना पायेगा।

दुनिया ट्रिलियन डॉलर का है
टैंक, नुक्लेअर बम का है।

दवा दारु की किल्लत है
दुनिया ने अब जानी है!

—- Arun Bharti

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कट्टरपंथी फूल

कट्टरपंथी फूल
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लोग
जब ज़िंदा होते हैं
तुम तब भी उनमें
हिन्दू और मुसलमान
ढूंढते हो

लोग
जब लाश बन जाते हैं
तुम तब भी उनमें
हिन्दू और मुसलमान
ढूंढते हो।

मैं
जब तक जिंदा हूँ
लोगों में
केवल और केवल
इंसान ढूंढता हूँ।

यही अंतर है
तुम में और मुझ में।
मैं इंसान गिनता हूँ
और तुम धर्म।

यहीं से
तुम्हारे और मेरे बीच
एक दीवार
खींच जाती है।

तुम्हारे आंगन में
कट्टरता के फूल उगते हैं।
उन्हें सुबह से शाम तक
तुम कई तरह का
पानी और खाद देते हो।

तुम्हारे टीवी से
सोशल मीडिया से
व्हाट्सऐप से
वह खाद और पानी
आता है।

यहीं पर हैं
तुम्हारे शाखा बाबू,
और मुल्ला मौलवी
और तुम्हारे प्रिय नेता
और तुम्हारा प्रिय पत्रकार
और तुम्हारा मित्र।

यही तुम्हें
सुबह से शाम
रात में सोने पर भी
एक कट्टर घूंट
पिलाते हैं।
और देते हैं,
खाद पानी।

तुम्हारी दुनिया
कितनी अलग है।
तुम पंडित और
पठान ढूंढते हो।

और मैं मीठा
शहद लेकर
इंसान ढूंढता हूँ।

तभी एक बस्ती जलती है
और एक बच जाती है।

@कॉपीराइट

Delhi Riots 2020

History has witnessed it. Time is witness. When rioters run amock it is the police which is the most communally charged.

I salute the few brave policemen who are true to their duty and sacrifice their life for society and for us. But there are very few in these situations.

SC has scoled the Delhi Police. Read today’s news for it’s observation. Recently i met a Delhi Police ASI. He was a Jat. He was like a typical RSS and BJP party worker. The hardcore one. The kattar Hindu type. I sensed that dangerous thought process coming to action. It has come in Jamia, JNU and it will come wherever it is required.

We the sane people, with different opinions but no intention in word or action to hurt anyone can only pray for the safety of the human kind.

I have called my friends, invited them to my place in emergency. One of my friend has lost his luxury car. It was burnt by the mob in Jafarabad. A mandir was burned. A masjid was burned. They saved their life and left the car behind. A Petrol pump was burned and so was his car.

No poltician, no influential person dies or his property is harmed in these times. It is the common people who are killed and their property and life is destroyed.

It is the police, the government which has to bring the order in the society. We can just pray and play safe.

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