कट्टरपंथी फूल

कट्टरपंथी फूल
—————-

लोग
जब ज़िंदा होते हैं
तुम तब भी उनमें
हिन्दू और मुसलमान
ढूंढते हो

लोग
जब लाश बन जाते हैं
तुम तब भी उनमें
हिन्दू और मुसलमान
ढूंढते हो।

मैं
जब तक जिंदा हूँ
लोगों में
केवल और केवल
इंसान ढूंढता हूँ।

यही अंतर है
तुम में और मुझ में।
मैं इंसान गिनता हूँ
और तुम धर्म।

यहीं से
तुम्हारे और मेरे बीच
एक दीवार
खींच जाती है।

तुम्हारे आंगन में
कट्टरता के फूल उगते हैं।
उन्हें सुबह से शाम तक
तुम कई तरह का
पानी और खाद देते हो।

तुम्हारे टीवी से
सोशल मीडिया से
व्हाट्सऐप से
वह खाद और पानी
आता है।

यहीं पर हैं
तुम्हारे शाखा बाबू,
और मुल्ला मौलवी
और तुम्हारे प्रिय नेता
और तुम्हारा प्रिय पत्रकार
और तुम्हारा मित्र।

यही तुम्हें
सुबह से शाम
रात में सोने पर भी
एक कट्टर घूंट
पिलाते हैं।
और देते हैं,
खाद पानी।

तुम्हारी दुनिया
कितनी अलग है।
तुम पंडित और
पठान ढूंढते हो।

और मैं मीठा
शहद लेकर
इंसान ढूंढता हूँ।

तभी एक बस्ती जलती है
और एक बच जाती है।

@कॉपीराइट

Delhi Riots 2020

History has witnessed it. Time is witness. When rioters run amock it is the police which is the most communally charged.

I salute the few brave policemen who are true to their duty and sacrifice their life for society and for us. But there are very few in these situations.

SC has scoled the Delhi Police. Read today’s news for it’s observation. Recently i met a Delhi Police ASI. He was a Jat. He was like a typical RSS and BJP party worker. The hardcore one. The kattar Hindu type. I sensed that dangerous thought process coming to action. It has come in Jamia, JNU and it will come wherever it is required.

We the sane people, with different opinions but no intention in word or action to hurt anyone can only pray for the safety of the human kind.

I have called my friends, invited them to my place in emergency. One of my friend has lost his luxury car. It was burnt by the mob in Jafarabad. A mandir was burned. A masjid was burned. They saved their life and left the car behind. A Petrol pump was burned and so was his car.

No poltician, no influential person dies or his property is harmed in these times. It is the common people who are killed and their property and life is destroyed.

It is the police, the government which has to bring the order in the society. We can just pray and play safe.

#delhipolice #riots #caa #ncr #anticaa #Modi #kejriwal #AmitSah #Supremecourt #humanity #bjp #rss #muslims #mandir #masjid #kapilMishra

एक मुफ्त की सलाह

एक मुफ्त की सलाह !

देखिये, मोदी को आना था। वो आ गये। उनकी सेना उनका राग गाती है। उनके विरोधी उनको गरियाते हैं। लेकिन 2024 तक उनकी सरकार है। केजरीवाल को आना था वो आ गए। उनके समर्थक और उनके विरोधी लड़ते रहेंगे। वो 2025 तक रहेंगे। इस तरह इन 5 सालों में कई चुनाव और मुद्दे आयेंगे जो आपको लड़ने और बिजी रहने का मौका देंगे। आप कितना भी गाली गलौज कर लीजिये इस सच को आप मिटा नहीं सकते कि 2025 तक तो इनका आप कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

अभी 2020 शुरू हुआ है। 2025 में 5 साल है। आपके रिज्यूम पर 5 साल में क्या क्या बदला यह तय करेगा आपके और आपके प्रियजनों का भविष्य। आपका रिटायरमेंट तय करेगा, आपका बैंक बैलेंस तय करेगा। 5 साल बहुत लंबा समय होता है। इसमें आप USA से MBA और PhD कर सकते हैं, UPSC निकाल कर अधिकारी बन सकते है। एक स्टार्टअप स्टार्ट कर करोड़पति बन सकते हैं। आपका नन्हा सा बच्चा 5 साल में बहुत समझदार और बातूनी बन सकता है।

इतना कुछ हो सकता है। लेकिन एक बात यह भी तय है कि सोशल मीडिया का राक्षस आपको चैन से रहने नहीं देगा। लड़ने से कोई फायदा नहीं। फेंकू तब भी फेंकेगा, केजरीवाल को 5 साल बाद भी आतंकवादी ही बोला जायेगा और राहुल गाँधी को तब भी पप्पू ही कहा जायेगा।

राजनीति में 5 साल 5 महीने जैसा भी नहीं होता। लेकिन आपके और मेरे जैसे लोगों के जीवन में 5 साल एक सुनहरा काल हो सकता है।

अब आप ये कहेंगे कि इतना बढिया ज्ञान दे रहे हो तो खुद क्यों नहीं चुप होते। तो मित्रों, मेरे अंदर लिखने का कीड़ा है। मुद्दे पर लिख लूं तो आध्यात्मिक सुख मिलता है। मेरा मकसद राजनीति में जाना नहीं है। उसके लिये गिरना पड़ता है। मेरे पैर मजबूत हैं और कमर अकड़ू है। ना मैं गिर सकता हूँ और ना झुक सकता है।

मैं अपना रिज्यूम और बैंक बैलेंस अच्छा करने में लगा रहता हूँ। मेरा सेंस ऑफ ह्यूमर भी थोड़ा पोलिटिकल है। इसलिए रोक नहीं पाता और लिख देता हूँ। कुछ बदलेगा इससे उम्मीद कम है। लेकिन मन को शांति मिलती रहेगी।

तेज हवा से लड़ना है तो अकड़ कर रहना पड़ेगा।

आपको तय करना है कि 2025 तक आप अपने को कहाँ झोंक कर रखते हैं। यहीं सोशल मीडिया पर लड़कर या कुछ अच्छा काम कर के !

— Arun Bharti

#ArvindKejriwal #RahulGandhi #Narendramodi #Election #DelhiElection #StateElection #Future #BankBalance #MBA #UPSC #PhD

http://www.khamoshdariya.com

Delhi Election 2020

One of the very few rare instances when a sitting CM has asked for 2nd term only on the basis of the works he has done. I am still a young follower of politics but the kind of resonance he has with people has never been heard of.

Most parties and candidates fight election on false promises, they win, do nothing except crime and corruption and again seek return based on more false promises.

When it comes to BJP, it always does same thing. Throw all resources in the ring to polarize voters on line of hatred. People get fooled in the name of national security and fear from minority which are merely 20%. Imagine 2 getting defeated by 8. That happens in movies. There has been gross & gutter level of public discourse.

Kejriwal has a fan base which is outcome of his work. People are his volunteers. Kejriwal will return again with thunder. But BJP, which spent close to a couple thousand crores with a team of 200 MPs, many CMs, MPs, Ministers and non other than divider in chief doing many rallies, it is bound to fool people and increase it’s tally.

For me AAP should get anything between 56 to 62. BJP should get 7 to 13 and Congress should get 1 seat.

I will save this post for post result comments.

Welcome Kejriwal for the new term. I will keep sending my electricity bill amount to your party fund or to some social cause.

Cheers to Democracy.

Let the evil perish not flourish through EVM !

#evm #delhielection2020 #kejriwal #namo #bjp #rss #delhielectionresults #arvindkejriwal #narendramodi #shaheenbagh #amitshah

तुम बिन

तुम बिन
———-
आज मैं एक बजे जगा। चाय और नाश्ता बनाते बनाते तीन बज गए। फिर सोचा,खाना भी बना लेता हूँ। ये सब करते करते पाँच बज गए। बीच में, बस नाश्ता भर कर पाया। मुझे केवल अपने लिए बनाना था। हाँ, दो चार बर्तन थे वह भी साफ किया।

यह आपको आपबीती जैसा लगेगा । जैसे मैं कोई हादसा बयाँ कर रहा हूँ। क्योंकि आज मेरी प्राणप्यारी एक दिन के लिये नहीं है। एक दिन में ही तारे दिखने लगते हैं।

आदत यह हो गयी है कि आराम से टहल कदमी करते रहिये, आपको बिस्तर पर ही गर्मा गरम चाय के साथ बढ़िया नाश्ता मिल जाता है। जब तक दो चार फेसबुक पोस्ट डालो, बढ़िया खाना मिल जाता है। फिर नहाये, बिना नहाये ऑफिस चले जाईये। वहाँ काम करिये, मजे करिये और घर आकर अगले दिन के इसी दिन चर्या के लिये शुरू हो जाइये।

और मेरी प्रिया, अपना कैरियर बनाती है, मेरे कबीर को संभालती है, जिम भी चली जाती है, फेसबुक भी कर लेती है, इंस्टाग्राम भी देख लेती है, और घर में मेरे इधर उधर फेंके गए सामान और कपड़े को करीने से सजाकर भी रख लेती है। एक घंटे के लिए कबीर को संभालना मुझे लिये पहाड़ सा लगता है और उसने हम दोनों को 4 साल से संभाला हुआ है।

कबीर मुझे मिस करता है केवल खेलने के लिये और अपनी ममा को मिस करता है अपने वजूद के लिये। मुझे लगता है कि मैं भी कबीर से बस थोड़ा सा बड़ा हूँ। क्योंकि उसकी ममा तो मुझे भी संभालती है।

बाहरी दुनिया को मैं बहुत ही सुलझा हुआ इंसान लगता हूँ। मेरे घर आकर देखिये। बस कबीर से थोड़ा सा ही बड़ा हूँ।

पुरूष वर्ग को लगता है कि घर वही चलाता है। क्योंकि वह कमाता है और पैसे लाता है। यह तब है, जब आपकी पत्नी कोई जॉब नहीं करती। इसलिए कई बार वह तैश में होता है और उनके हिस्से का सम्मान नहीं देता। कई बार वो औकात वगैरह की भी बात करने लगते हैं।

एक दिन आप घर संभालिये, या रोल रिवर्स कर लीजिये, आपको यकीन हो जायेगा कि घर आप नहीं चलाते। आप चला भी नहीं सकते। आपको लग जायेगा कि दुनिया का कोई सबसे बड़ा सीईओ है, तो वो आपके घर को संभाल रहा है। और उसे सबसे ज्यादा वेतन मिलना चाहिए।

गांव और छोटे कस्बों में आज भी औरत को सम्मान नहीं मिलता। उसको बस चूल्हा चौकी के लायक समझा जाता है। और उसको उसकी औकात भी बताई जाती है। पुरुष को जिस बात का भी गुरुर है, वह एक सप्ताह में टूट जायेगा। बस उसे वही करना है जो वह औरत को करते देख रहा था। समाजवाद और समानता की शुरुआत अपने आंगन में जरूरी है। देश बदल जायेगा, दुनिया बदल जायेगी।

जब भी मेरे दो रत्न मुझसे दूर होते हैं तो मैं कविता या लेख लिखने लगता हूँ। फिलॉस्फिकल हो जाता है। जीवन और रिश्तों का मतलब खोजने लगता हूँ। अपने वजूद को तौलने लगता हूँ।

और फिर याद आता है, जो कभी लिखा था :

“तुम बिन,अपना मोल न जानू
तुम बिन,बहुत अधूरा हूँ!
तुम ही, मेरा आदि अंत हो
तुमसे ही, मैं पूरा हूँ”

#love #relationship #kabir #housewife #ManVsWoman #childcare #children

http://www.khamoshdariya.com

झूठ बोलते हो

तुम झूठ बोलते हो
किससे?
मुझसे?
चलेगा,
लेकिन अपने आप से ?
फिर कैसे मुँह दिखाओगे
अपने आप को
अपनी आत्मा को
जब आईना देखोगे
जब नितांत अकेले होंगे

इंसान तब तक जिंदा है
जब तक वो खुद से
आँख मिला पाता है।
मरने से ठीक पहले
कुछ क्षण के लिये
तुम्हारा जीवन
घूमता है
तुम्हारे सामने

उस पल तुम
गर्व कर सको
अपने ऊपर
इसके लिए जियो

जग से झूठ बोलो
खुद से मत बोलो!

Website Powered by WordPress.com.

Up ↑