तुम बिन

तुम बिन
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आज मैं एक बजे जगा। चाय और नाश्ता बनाते बनाते तीन बज गए। फिर सोचा,खाना भी बना लेता हूँ। ये सब करते करते पाँच बज गए। बीच में, बस नाश्ता भर कर पाया। मुझे केवल अपने लिए बनाना था। हाँ, दो चार बर्तन थे वह भी साफ किया।

यह आपको आपबीती जैसा लगेगा । जैसे मैं कोई हादसा बयाँ कर रहा हूँ। क्योंकि आज मेरी प्राणप्यारी एक दिन के लिये नहीं है। एक दिन में ही तारे दिखने लगते हैं।

आदत यह हो गयी है कि आराम से टहल कदमी करते रहिये, आपको बिस्तर पर ही गर्मा गरम चाय के साथ बढ़िया नाश्ता मिल जाता है। जब तक दो चार फेसबुक पोस्ट डालो, बढ़िया खाना मिल जाता है। फिर नहाये, बिना नहाये ऑफिस चले जाईये। वहाँ काम करिये, मजे करिये और घर आकर अगले दिन के इसी दिन चर्या के लिये शुरू हो जाइये।

और मेरी प्रिया, अपना कैरियर बनाती है, मेरे कबीर को संभालती है, जिम भी चली जाती है, फेसबुक भी कर लेती है, इंस्टाग्राम भी देख लेती है, और घर में मेरे इधर उधर फेंके गए सामान और कपड़े को करीने से सजाकर भी रख लेती है। एक घंटे के लिए कबीर को संभालना मुझे लिये पहाड़ सा लगता है और उसने हम दोनों को 4 साल से संभाला हुआ है।

कबीर मुझे मिस करता है केवल खेलने के लिये और अपनी ममा को मिस करता है अपने वजूद के लिये। मुझे लगता है कि मैं भी कबीर से बस थोड़ा सा बड़ा हूँ। क्योंकि उसकी ममा तो मुझे भी संभालती है।

बाहरी दुनिया को मैं बहुत ही सुलझा हुआ इंसान लगता हूँ। मेरे घर आकर देखिये। बस कबीर से थोड़ा सा ही बड़ा हूँ।

पुरूष वर्ग को लगता है कि घर वही चलाता है। क्योंकि वह कमाता है और पैसे लाता है। यह तब है, जब आपकी पत्नी कोई जॉब नहीं करती। इसलिए कई बार वह तैश में होता है और उनके हिस्से का सम्मान नहीं देता। कई बार वो औकात वगैरह की भी बात करने लगते हैं।

एक दिन आप घर संभालिये, या रोल रिवर्स कर लीजिये, आपको यकीन हो जायेगा कि घर आप नहीं चलाते। आप चला भी नहीं सकते। आपको लग जायेगा कि दुनिया का कोई सबसे बड़ा सीईओ है, तो वो आपके घर को संभाल रहा है। और उसे सबसे ज्यादा वेतन मिलना चाहिए।

गांव और छोटे कस्बों में आज भी औरत को सम्मान नहीं मिलता। उसको बस चूल्हा चौकी के लायक समझा जाता है। और उसको उसकी औकात भी बताई जाती है। पुरुष को जिस बात का भी गुरुर है, वह एक सप्ताह में टूट जायेगा। बस उसे वही करना है जो वह औरत को करते देख रहा था। समाजवाद और समानता की शुरुआत अपने आंगन में जरूरी है। देश बदल जायेगा, दुनिया बदल जायेगी।

जब भी मेरे दो रत्न मुझसे दूर होते हैं तो मैं कविता या लेख लिखने लगता हूँ। फिलॉस्फिकल हो जाता है। जीवन और रिश्तों का मतलब खोजने लगता हूँ। अपने वजूद को तौलने लगता हूँ।

और फिर याद आता है, जो कभी लिखा था :

“तुम बिन,अपना मोल न जानू
तुम बिन,बहुत अधूरा हूँ!
तुम ही, मेरा आदि अंत हो
तुमसे ही, मैं पूरा हूँ”

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झूठ बोलते हो

तुम झूठ बोलते हो
किससे?
मुझसे?
चलेगा,
लेकिन अपने आप से ?
फिर कैसे मुँह दिखाओगे
अपने आप को
अपनी आत्मा को
जब आईना देखोगे
जब नितांत अकेले होंगे

इंसान तब तक जिंदा है
जब तक वो खुद से
आँख मिला पाता है।
मरने से ठीक पहले
कुछ क्षण के लिये
तुम्हारा जीवन
घूमता है
तुम्हारे सामने

उस पल तुम
गर्व कर सको
अपने ऊपर
इसके लिए जियो

जग से झूठ बोलो
खुद से मत बोलो!

आतंकी कौम

देश जब जब आग में जलता है,
भाजपा वोट का भजिया तलता है।

इकॉनमी से इनका इतना ही नाता है,
जितना एक शिशु को पढ़ाई में आता है।

देश जलेगा, कमल खिलेगा,
बस इतना इनका नारा है।

भाग जा मुल्ला, छोड़ दे मुल्ला
ये सारा देश हमारा है।

तिलक लगाकर हिन्दू बन ले,
टोपी पहनकर मुसलमान।

खुशी खुशी ये दंगा कर ले,
सरकार इसपर मेहरबान।

इंकलाब का नारा दे दो,
देश बचाओ भाई।

पिछले पाँच साल से,
आतंकी कौम है आई।

— Arun Bharti

मैं तटस्थ हूँ

मैं तटस्थ हूँ
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लिख सकते हैं
तो लिखिए
बोल सकते हैं
तो बोलिये
प्रोटेस्ट कर सकते हैं
तो करिये
दिख सकते हैं
तो दिखिये
ये सब सिख सकते हैं
तो सीखिये।

मैं तटस्थ हूँ,
मेरा कोई पक्ष नहीं
मैं इस लफड़े में
नहीं पड़ता
यह मत कहिये।

तटस्थ कायर होता है,
मौकापरस्त होता है,
बिना रीढ़ का होता है,
नरसंहार का भागी होता है
इतिहास में पापी होता है।

तटस्थ होना
मिथ्या है, झूठ है।
जो कायर,
अपने आप से
बोलता है।

— Arun Bharti

एक आदमी का प्लान

एक आदमी को एक खास आदमी से बहुत नफरत थी। कई सालों से वो उसको मारने का प्लान बना रहा है। पहले उसके दादा ने बनाया । फिर उसके पापा ने। अब उसका समय आया है। अब वो मजबूत भी है। हथियार खरीद सकता है। उसने बंदूक खरीदा। लेकिन उसको डाउट है। कहीं बंदूक नहीं चली तो। एक दिन चलाया था। निशाना चूक गया। खुद के हाथ पर भी चोट आई। इसलिए अब वो चाकू भी साथ रखता है। चाकू धारदार है। अब वो तैयार है। उससे पूछिये तो कहता है कि यह उसने अपने एक दूर के भाई की सुरक्षा के लिए लिया है। साथ ही यह भी कहता है कि उसको अपनी सुरक्षा भी करनी है।लोग भावुक हो जाते हैं उसकी दीनता पर।

उसके पास प्लान A भी है और प्लान B भी है। अब उसका हमला एकदम कारगर होगा। ऐसा उसे भरोसा है।

इस पोस्ट का NCR और CAA से कोई लेना देना नहीं!

कुमार सानू का जादू

मैं योग नहीं करता। मेडिटेशन भी नहीं करता। पूजा अर्चना भी नहीं करता। और इतने लोगों से शाब्दिक युद्ध भी करता हूँ। मतलब, विचार वार! ऐसे में मन को शांत रखने के लिए अपने प्रभु कुमार सानू की शरण में जाता हूँ। कुमार सानू, नदीम श्रवण और समीर अनजान की तिकड़ी ही मेरे आध्यात्मिक गुरु हैं। अलग सुकून की दुनिया में ले जाते है। जहाँ कोई शोर नहीं है। वहाँ है तो बस प्रेम, श्रृंगार, मीठी जादुई आवाज़ और मधुर लय। यही है मेरा आनंद !!

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