क्या वो देवी है? अवतार है?

क्या वो देवी है? अवतार है?
———————————

वही धरा है, वही धाम है।
वही है दुर्गा, वही सतनाम है।

माँ के आँचल में ममता की छांव है,
स्नेह, प्यार, दुलार और क्षीरसागर है।

पत्नी प्रेमिका की आँखों में,
दुनिया जहाँ का सुकून है।

वो बेटी के रूप में माथे का तिलक है,
वो भाई की कलाई  पर रक्षा का संदेश है।

घर है स्वर्ग, इन देवियों का वास यहां होता है,
वनमानुष से तराश तराश इंसान यहां होता है।

एक अबोध बालक से पूछो उसके माँ की शक्ति,
तीनों लोकों में मानेगा सबसे बढकर वो भक्ति।

स्त्री घर का सूर्य है, और है घर की धूरि,
बन्दर को इंसान बनाये, उसी में जन्नत पूरी।

ये शब्दों का जाल नहीं है, नहीं है कोई छलावा,
मनभावन इस देवी पर, अपना मन भर आया।

इस देवी को पत्थर में, भगवान बना देते हैं,
घर में, चार दीवारी में अबला इंसान बना देते हैं।

सड़क से संसद तक, मंदिर से लेकर गांव तक,
इस देवी को रोज रोज लहूलुहान किया जाता है।

उस नारी से पूछो, क्या वो देवी है? अवतार है?
राक्षस जिसपे रोज करते हजारों अत्याचार है।

आज दिवस है उनका, उनको दंडवत प्रणाम है,
घर मंदिर और उस धुरी को प्रेम सहित सलाम है।

©बिहारी चौपाल

http://www.arunbharti.wordpress.com

घरवाली- बाहरवाली

घरवाली- बाहरवाली


चेहरे पे सौम्यता आँखों में लाज की लाली हो,ऐसी मेरी घरवाली हो.
चेहरे पे शरारत नैन नशे की प्याली हो,ऐसी वो बाहरवाली हो.
घरवाली ऐसी हो की
साड़ी से जो खुश हो जावे,पति सेवा बस ध्यान में लावे.
जींस टॉप से दूर रहे जो,पूज्य हैं आप ये कहे जो.
जितने चाहूँ उतने बच्चे जन दे,हर पल अपना तन मन दे.
सास ससुर को खीर खिलावे,मम्मी के वो पावं दबावे.
फ़ोन से मेरे दूर रहे, पैसों से मजबूर रहे.
भजन कीर्तन का शौक हो, चारदीवारी बस उसकी रौनक हो.
परपुरुष जिसको पाप लगे, उमदराज लोग बाप लगे.
चाय से लेकर भोजन तक सबका उसको ध्यान रहे.
शारीरिक भूख से सात्विक भूख तक सबका उसको सम्मान रहे.
फिगर से लैला ना भी लगे पर मन से वो सावित्री हो.
मजाक की बातें भाये जिसको थोड़ी सी कवियत्री हो.
मेरे लक्ष्य में जिसकी नैया पार लगे.
उसकी आँखों में धुन हो मेरी,बस मेरा वो प्यार लगे.
जिसके वंश में संस्कृति मन में संस्कार हो.

मेरे चरणों की दासी हो बस मेरा अधिकार हो.
बाहर वाली ऐसी हो की
जींस टॉप को खास कहे वो या उससे भी कपडे कम हों.
रिश्ते की ना बात करे वो, इमोशनल लफड़े कम हों.
फास्ट फ़ूड में मस्त रहे,मेरी बाँहों में पस्त रहे.
दारू सुट्टा जिसको भाये,जब भी बुलावूँ तब आ जाये.
अमीर बाप की बेटी हो,सब मेरे बिल देती हो.
सारी किस्म की फिल्में देखे,मेरे तन को खूब निरेखे.
फिगर हो जिसकी अच्छी खासी,बॉडी को बस दे शाबासी.
बिना शादी के साथ रहे,जो जी चाहे दिल खोल कहे.
फ्यूचर की जिसको चिंता न हो,मेरे नाकामी पे शर्मिंदा न हो.
हर बातो को कुल कहे,गधे को ब्यूटीफुल कहे.
दिन रात मस्ती दे ऐसी, गांजे की ऐसी की तैसी.
चिंतित हूँ इस बात को लेकर, किसको पकडूं किसको छोडूं.
एक मिठाई एक नमक है दोनों से ही रिश्ता जोडूं.
 

Website Powered by WordPress.com.

Up ↑