माननीय महोदय

BJP  वाले ममता दादी को “तोला बाज” कह रहे हैं। और मोमता दीदी मोदी का “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा दंगाबाज” कह रही हैं।

BJP वाले कह रहे हैं कि बंगाल को आंटी की नहीं बेटी की जरूरत है, बोले तो जवान लड़की की। और इनको अपना नेता परदादा की उम्र का तेज फेंकने वाला पसन्द है।

और, आम नागरिक ऐसा वैसा कुछ लिख दे, कह दे इनको तो, इनका अपमान होता है, मानहानि होती है। और आपके ऊपर ज्यादा निगाह गड़ा लिए तो सीधे देशद्रोह में अंदर कर देंगे।

ये वही माननीय लोग हैं, तो संसद में और विधानसभा में ताननिय हो जाते है, कुर्सी, जूता, चप्पल फेंक कर एक दूसरे को मारते हैं। और इनकी मुर्गा मुर्गी की लड़ाई पूरा विश्व देख रहा होता है।

बताईये आप, ये कैसे माननीय हैं जी !!

ठाकुर का न्याय

ठाकुर का न्याय !
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एक गांव में एक ठाकुर था। वो उस गांव का सरपंच था। एक दिन उसका एक दोस्त आया चुपके से रात में। बताया कि भाई मैंने बहुत घपला किया है। कई सारे लोग हैं आपके जानने वाले भी उसमें, अब क्या करूँ। ठाकुर ने कहा: बगल के गांव भाग जा फिलहाल। मैं बात कर लूंगा उस गांव के ठाकुर से। बस दिखना मत। सबको दिखाऊंगा की तुमको पकड़ने की कोशिश कर रहा हूँ। एक दो महीने बाद बुला लूंगा। गांव की और मेरी इज्जत भी बच जायेगी। चिंता ना कर। ये सब होते रहता है। तू छोटा भाई है मेरा।

चिल्ल मार अब !
जा हुक्का ला!

हां सुबह सूरज ढलने से पहने निकल जाना। समझे !

ये सारे पात्र काल्पनिक हैं। इनका 11 हजार करोड़ से कोई लेना देना नहीं है। डायमंड से तो बिल्कुल भी नहीं।

बोलो जय मोदी!
बोलो जय माल्या!
बोलो जय चोकसी !

Gandhi and Godse

Mahatma Gandhi
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Whenever you are into a peaceful protest for your legitimate rights you are with Gandhi. Whenever you are the reason to awake the oppressed class you are with Gandhi.

India was sleeping when Gandhi came back from South Africa. He kept you waking up. And India woke up to Indepedence.

Bullet has never solved any problem. It never will. It simply gives a chance of arm race. And war is the bussines of rich, powerful and capitalists at the cost of normal tax paying citizens.

Nathuram Godse was a coward, psychopath criminal. Those who remember him are shallow and retarded individuals

Firing a bullet is the easiest job, if you are not ready for consequences.

नाज़ुक मन

ऐसे तो वक़्त कटता नहीं,
लेकिन मन बहला लेता हूँ।

तुम जाती हो जब कहीं दूर,
कई तरह का खाना बना लेता हूँ।

इस बार पांच दिन में पांच सब्जी बनाया,
बैगन भर्ता, मिक्स वेग, एग करी,आलू टमाटर,
और कढ़ाई पनीर में समय गंवाया ।

लोग कहते हैं कि बीबी मायके गयी है,
बढ़िया है, बैचलर लाइफ एन्जॉय करो।

उन्हें क्या बताऊँ, की उसके बिना तो,
नींद और सांस दोनों में तक़लीफ़ होती है।

मेरी कविता व्यावहारिक है,
और प्यार अनोखा ताजा है।

तुमसे कहता हूँ जल्दी आओ,
नाजुक मन का तकाजा है !

©अरुण भारती

अपनों से प्यार

अपनों से प्यार !
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जब आप किसी से बहुत प्यार करते हैं,
उनकी सुरक्षा और रखवाली करते हैं,
इतना कि अपना सर्वश्व न्योक्षावर करने से पहले,
एक पल ले लिए भी डगमग नहीं होते,
तो उनकी आवाज, आपको पुकारती आवाज,
अक्सर सुनाई देती है, नितांत सन्नाटे में भी।

मुझे मेरे कबीर की आवाज,
रुचि की आवाज,
मेरे बाबूजी और माँ की आवाज,
मेरे छोटे भाई बहनों की आवाज,
अक्सर ऐसे ही सुनाई देती है!

फिर ध्यान से देखता हूँ!
तो या तो सुनसान,
या कोई और इंसान होता है!

: अरुण भारती

हमें कचरा पसन्द है !

हमें कचरा पसन्द है!
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31 साल का तेजस्वी यादव अकेले नीतीश कुमार, सुशील मोदी, नरेंद्र मोदी, संघ संगठन और भाजपा जैसी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के 40 से 50 साल के पोलिटिकल कैरियर पर भारी पड़ता है।

लालू यादव परिवार में लाख बुराईयां हों, लेकिन यह भी सच हैं कि ये बुराईयां सब में है, और जिनका नाम ऊपर है उन लोगों से कम है। और सबसे बड़ी बात यह है कि इन्होंने संघ के हाथी जैसे एजेंडे के आगे सिर नहीं झुकाया। ऐसी और पार्टी का नाम बताइये।

जगन्नाथ मिश्रा के समय से चला आ रहा घोटाला जो कुल जमा लगभग ₹900 करोड़ का था यदि सृजन घोटाले के ₹3000 करोड़ से अधिक है, मुज्जफरपुर के बालिका शेल्टर होम बलात्कार से जघन्य है तो फिर आपका गणित और चरित्र दोनों गड़बड़ है।

चारा खाये मिश्रा जी और चारा चोर हुवा यादव। क्योंकि संघ जैसे सांड को उसकी सिंग से पकड़कर पटकने वाला आजकल जेल में है। और उस सांड की हार से उन सबको दर्द होता था जो जातिवादी ऐड़ी उठाकर ऊँचा होते थे और सांड के तहसनहस करने पर उत्सव मनाते थे।

राजद, तेजस्वी और लालू यादव का चरित्र संघ से बेहतर है। और उनकी जेब में पड़ा पैसा संघ और उसके अगुवाई करने वालों से कहीं बहुत ही ज्यादा कम।

रही बात, भ्रष्ट और अपराधी की तो, मैं और मेरे कई सारे मित्र साफ सुथरा हैं। उन्हें टिकट कौन देगा, वोट कौन देगा।

इस देश को लोगों को पढ़ा लिखा बस वाद विवाद और कैरियर गाइड के लिये अच्छा लगता है। MLA, MP, CM और PM तो उन्हें उस डब्बे से चाहिये जिसमें खून है, जला हुआ सामान है, खोखा और पेटी है, तस्करी का बारूद है, और सेना के काम आने वाली AK47 है!

हमें कचरा पसंद है, लेकिन प्यार तो हम पढ़े लिखे सफेदपोशों से करना चाहते हैं !

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