कंगना रनौत और सुशांत का न्याय

कंगना रनौत और सुशांत का न्याय

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कंगना रनौत :
On ODD days : मुझे बहुत बुरा लगता है जब कोई मोदी जी का सम्मान नहीं करता। वो इस देश के PM हैं।
On Even days : उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है !
एक दिन में कई शब्दों का प्रयोग। कश्मीरी पंडितों का दर्द समझ सकती हूँ। मेरा घर राम मंदिर है। बाबर के लोगों ने बाबरी मस्जिद बना दी। मुंबई पाकिस्तान हो गया। जय श्री राम !
यह महिला कुछ बड़ा ही खरनाक चीज लेती है। जिससे यह इतना बोलती है। व्हाट्सएप का ज्ञान लेकर। या तो यह पागल है या इसके पीछे बहुत बड़ी ताकत है। जिससे इसको इतनी हिम्मत मिल रही है। यु नो हु।
48 करोड़ के घर मे रहकर, लोगों को टैक्स पेयर के पैसे को बर्बाद करने का ज्ञान देने वाली, बिना किसी वाजिब डर के, Y कैटेगरी की सेक्युरिटी ले रही है, एक स्टेटस सिम्बोलिस्म के लिये।
मामला शुरू हुआ था, सुशांत के लिये न्याय मांगने से। उसका कत्ल हुआ है।नेपोटिसम के कारण। जी भर कर सबको गालियाँ मिली। मैंने भी दी गालियाँ। लेकिन कुछ दिनों में ही लग गया कि मैं गलत हूँ। मेरा गुस्सा जायज है, लेकिन सुशांत की मौत का कारण क्या है नहीं पता।
कंगना ने बोलना शुरू किया। पायल रोहतगी ने बोलना शुरू किया। हर ऐरा गैरा केस सुलझाने में लग गया। कोई पुनीत वशिष्ठ है, जिसके एक फेसबुक पोस्ट ने हंगामा मचा दिया। जब मामला लीगल हुआ तो उसने पोस्ट के नीचे लिख दिया फोरवर्डेड। उसकी जिम्मेदारी खत्म।
सुशांत के परिवार ने केस दर्ज किया। कि उसकी हत्या हुई है। 15 करोड़ का हेर फेर हुआ है। रिया उसकी GF थी, वो फँस गयी। फिर शुरू हुआ घिनौना खेल। पता चला कि वो ड्रग लेता था, एक दशक से मानसिक बीमार था। 15 करोड़ भी नहीं मिले थे उसे। नेपोटिसम का शिकार भी नहीं था। रिया फसती गयी। राजनीति का मोहरा बन गयी। और उसका परिवार जेल में है।
केस हुआ था हत्या और पैसे की लूट का। बन गया ड्रग का। यदि रिया उन सब की तरह ड्रग लेती है और अकेले जेल में है, तो क्या सुशांत की आत्मा को शांति मिलेगी? क्या उसकी आत्मा उसे माफ़ कर पायेगी, जिसकी फूंकने की वजह से एक परिवार को सूली पर चढ़ाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में कंगना केवल अपनी रोटी सेंकती रही। वो बोलती है। कुछ भी बोलती है। लगातार बोलती है। उसे लगता है कि उसको बहुत कुछ पता है। ऐसा अक्सर व्हाट्सएप वाले ज्ञानी के साथ होता है। उसने मणिकर्णिका की तो उसे लगता है वो झाँसी की रानी है। वह भूल गयी कि वह कोठे वाली रज्जो भी बनी थी। सौ चूहे खा कर बिल्ली चली हज को।
इस पूरे हो हल्ला में, सुशांत का मामला पीछे हो गया। कंगना ने इसे हाईजैक कर लिया। अपने न्याय और अन्याय का मामला बना दिया। महाराष्ट्र सरकार को गालियां दी। क्रिटिसिज्म ठीक है। लेकिन जहाँ से तुमने अपना वजूद बनाया उसे पाकिस्तान कहना बेशर्मी की इंतेहा है।
कंगना यह भूल गयी है कि राजनीति में कोई भी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। राजनीति में 2 प्लस 2 कभी 4 तो कभी 3 तो कभी 2 भी होता है। उसे लगता है कि अमित शाह, मोदी और भाजपा का IT सेल मेहरबान है। बिल्कुल है। क्योंकि GDP 24% गिरा है, कोरोना से लाखों लोग ग्रसित हैं, करोड़ो लोग बेरोजगारी और भुखमरी से।
अब थाली और ताली बजाना काम नहीं आ रहा। अर्णब, सुधिर, रुबिका, नाविका, अंजना, अमिश, रजत, दीपक इत्यादि अपना 24/7 काम कर रहें हैं। ताकि मुद्दों पर बात न हो। इसमें सबसे मुखर अभी कंगना है।
लेकिन कल किसने देखा है। कल को अमित शाह और उद्धव ठाकरे एक साथ मातोश्री में काश्मीरी पुलाव और पंजाबी रायता खाते मिल जायेंगे। उस दिन कंगना को अपने इश्तेमाल होने का अहसास होगा। उस दिन उसे आदित्य पंचोली अच्छे लगेंगे। और गुस्से से सिर फटने को होगा।
राजनीति घाघ लोगों का खेल है। यदि कंगना को लगता है कि वो समझ गयी है। तो यह उसकी नीरा मूर्खता है। राजनीति समझने के लिये इसमें उतरना जरूरी है। तभी मोल भाव समझ में आयेगा। संजय दत्त, अमिताभ बच्चन जैसे मेगा स्टार अपना हाथ आजमा चुके हैं। फिर अपनी रंगीन नकली दुनिया में वापस चले गये।
कंगना का भ्रम भी देर सवेर टूटेगा। और अरमान के टूटने पर बहुत दर्द होता है। उम्मीद है कि यह दर्द सुशांत जैसा न हो।
तब तक आप कंगना नाम की नई राखी सावंत और ड्रामा क़वीन के जुमलों और गमलों का लुत्फ उठाइये।

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