इन रिश्तों का सामान !
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तुम जो रिश्ते को
परचून की दुकान समझते हो
पान का थूकदान समझते हो
रेलवे का प्लेटफार्म समझते हो
क्या गज़ब करते हो.
तुम जो रिश्ते को
बिना भाड़े का मकान समझते हो
तुम्हारे इंतज़ार में बस हम जगे
ऐसा जागरूक मेजबान समझते हो
क्या गज़ब करते हो.
मूलरूप से तुम व्यापारी
हर रिश्ते का मोल लगाते हो
लेन देन के खेल में बस
लेन लेन ही खाते हो
मैं बेचारा सीधा साधा
सच्चा सा मेजबान
चलो उठाओ ठगने वाला
इन रिश्तों का सामान !
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Copyright@ Arun Bharti
Thanks Brother !
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Bas dil ke paar ho gyi ye kavita aapki …
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