धरती के रिश्ते

धरती के रिश्ते 

धरती और मुझ में एक बात खास है.
हमारे ज़ीने के अंदाज़ पास पास हैं.

तुम्हारे पास सूरज की धुप है और चंदा की शीतलता है.
मेरे पास उसके होठों की गर्मी और छुवन की कोमलता है.

तुम्हारे पास शहर हैं तो गाँव भी हैं.
मेरे पास तुम हो तुम्हारी यादों के छावं भी है.

धरती तुम्हारे पास हरियाली है तो सुखा भी है.
मैंने उसके अंतस को और विरह को देखा भी है.

तुम्हारे पास कलकल करती नदियाँ है,लोगों का अम्बार है.
मेरे पास उसके नैन अश्रु है,उसका अन्छुवा सा प्यार है.

तुम इतराती हो तुम्हारे पास कश्मीर है.
मेरे पास वो पूरा है सशरीर है.

तुमको गर्व है की संसद है महल है.
मैं खुश हूँ मेरे पास ताजमहल है.

तुम्हारे पास संघर्ष है तो प्रेम भी है.
मैं उसका आस हूँ वो मेरा नेम भी है.

धरती मुझे उससे भी प्यार है तुमसे भी प्यार है.
हमारे सुख दुःख एक हैं,हम अच्छे यार हैं.

-------------(अरुण भारती 'चिंतित')

2 thoughts on “धरती के रिश्ते

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  1. तुम्हारे पास शहर हैं तो गाँव भी हैं.
    मेरे पास तुम हो तुम्हारी यादों के छावं भी है.

    Bahut sunder…puri poem hi khubsurat hai lekin ye doline bahut achchi lagi!

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