एक तरफ मतवाली तुम हो
एक तरफ दारू की बोतल,एक तरफ मतवाली तुम हो.
एक तरफ है चखना चटपट, एक तरफ रसवाली तुम हो.
एक तरफ अंगूरी रस है, एक तरफ गुलाबी तुम हो.
एक तरफ तीखी सांसे हैं, एक तरफ कस्तूरी तुम हो.
एक तरफ बोतल की घनघन,एक तरफ पायल की छनछन.
एक तरफ पैग की झंझट, एक तरफ सागर बिन तट.
एक तरफ बदसूरत बोतल,एक तरफ सुडौल बदन तुम.
एक तरफ फूहड़ गाने हैं, एक तरफ मीठी कोयल तुम.
एक तरफ गन्दा मदिरालय, नख-शिख तक तुम शीशमहल हो.
एक तरफ मटमैली चादर, अंग अंग से तुम मखमल हो.
कौन भला मदिरालय जाये,पैसे की अब बली चढ़ाये.
अधरों से अब छू लेने दो,नैनों से अब पी लेने दो.
अंकपाश में बांध लो,पल में सदियाँ जी लेने दो.
इस नशे से चिंतित जी जीवन भर पार न पाएंगे.
जग से वैरागी होकर,तुम्हरे मदिरालय आयेंगे.
—– अरुण भारती ‘चिंतित’
Bahut khub..ahha…Simply great one.
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