“खिड़की का परदा हिलता है और लगता है तुम आई हो
जब जब दिल धड़कता है लगता है तुम्ही समायी हो
मेरी सांसो जी गर्मी में, गीतों में ,गजल, तरानो में
नयनों के उमंगो में या उनके घायल क्रंदन में
मेरी मदहोश तरंगों में, रग रग में तुम्ही समाई हो
मेरे ख्वाबो के सावन में तुम रिमझिम बनकर आई हो
नए शहर में जब मैं आया तुम बिन बहुत अकेला था
ख़ुद में मैं था लीं मगर तुम्हरी यादों का मेला था
हर चेहरे में तुमको ढूंढा,भीड़ में ख़ुद को तनहा पाया
एक झलक तुम्हरी मिल जाती, पल पल ताकता आस लगाया
पुरवा की बयार से पूछा, हर मौसम से हाल तुम्हारा
चाँदनी रातों से पूछा, पंछी से पूछा पता तुम्हारा
हर अनजाने चेहरे में तुम्हारी ही तलाश रही
सपनो में तुम आओगी, इतनी बाकी आस रही.
जब भी सुंदर नयनो से मेरी नयने टकराई
बलखाती अठखेलियों वाली,बस तुम ही तो याद आई
भीड़ में तनहा खड़ा हुआ एक मधुर संगीत सुना
मन यूँ चंचल हो बैठा,जैसे की तुमने गया हो
1st क्लास की खिड़की से महिला डब्बा को निहारता हूँ
टिकेट खिड़की की कतारों में पल पल तुमको ढूंढ़ता हूँ
एक दिन यु बस में बैठा,एक भीनी सुगंध हवा ने लायी
आँखे छल छल हो बैठी शायद तुम हो अब आई
internet पर जब भी बैठा तुम्हारा नाम ढूंढ़ता रहा
एक असीम बिश्वास से तुमको ही पूजता रहा
जब भी आँखे उनींदी होती, सपनो को बुलाता हूँ
सपनो में तुम आती हो, अद्भुत सुख में पता हूँ
हर दर्द में खुसी में बस तुमको ही मैं गाता हूँ
जीवन के हर अहसास में तुमको ही निभाता हूँ
इस जीवन का मोल न जानू तुम बिन बहुत अधुरा हूँ
तुम ही मेरा आदि -अंत हो तुमसे ही मैं पुरा हूँ ”
(written on: 16 Aug 2008
Completed on: 16 Feb 2009)
Cheers
Holy-Devil