तुम बिन रह नहीं पाते

ये कुदरत का खेल कैसा है की तुम बिन रह नहीं पाते.
प्रेम अगन है दलदल है ये खुद को कह नहीं पाते.
तुम जब साथ रहती हो दिल फूलों की क्यारी लगता है.
जब तुम दूर रहती हो तो जीना भी भारी लगता है.

————-(अरुण भारती ‘चिंतित’)

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