माननीय महोदय

BJP  वाले ममता दादी को “तोला बाज” कह रहे हैं। और मोमता दीदी मोदी का “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा दंगाबाज” कह रही हैं।

BJP वाले कह रहे हैं कि बंगाल को आंटी की नहीं बेटी की जरूरत है, बोले तो जवान लड़की की। और इनको अपना नेता परदादा की उम्र का तेज फेंकने वाला पसन्द है।

और, आम नागरिक ऐसा वैसा कुछ लिख दे, कह दे इनको तो, इनका अपमान होता है, मानहानि होती है। और आपके ऊपर ज्यादा निगाह गड़ा लिए तो सीधे देशद्रोह में अंदर कर देंगे।

ये वही माननीय लोग हैं, तो संसद में और विधानसभा में ताननिय हो जाते है, कुर्सी, जूता, चप्पल फेंक कर एक दूसरे को मारते हैं। और इनकी मुर्गा मुर्गी की लड़ाई पूरा विश्व देख रहा होता है।

बताईये आप, ये कैसे माननीय हैं जी !!

हमें कचरा पसन्द है !

हमें कचरा पसन्द है!
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31 साल का तेजस्वी यादव अकेले नीतीश कुमार, सुशील मोदी, नरेंद्र मोदी, संघ संगठन और भाजपा जैसी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के 40 से 50 साल के पोलिटिकल कैरियर पर भारी पड़ता है।

लालू यादव परिवार में लाख बुराईयां हों, लेकिन यह भी सच हैं कि ये बुराईयां सब में है, और जिनका नाम ऊपर है उन लोगों से कम है। और सबसे बड़ी बात यह है कि इन्होंने संघ के हाथी जैसे एजेंडे के आगे सिर नहीं झुकाया। ऐसी और पार्टी का नाम बताइये।

जगन्नाथ मिश्रा के समय से चला आ रहा घोटाला जो कुल जमा लगभग ₹900 करोड़ का था यदि सृजन घोटाले के ₹3000 करोड़ से अधिक है, मुज्जफरपुर के बालिका शेल्टर होम बलात्कार से जघन्य है तो फिर आपका गणित और चरित्र दोनों गड़बड़ है।

चारा खाये मिश्रा जी और चारा चोर हुवा यादव। क्योंकि संघ जैसे सांड को उसकी सिंग से पकड़कर पटकने वाला आजकल जेल में है। और उस सांड की हार से उन सबको दर्द होता था जो जातिवादी ऐड़ी उठाकर ऊँचा होते थे और सांड के तहसनहस करने पर उत्सव मनाते थे।

राजद, तेजस्वी और लालू यादव का चरित्र संघ से बेहतर है। और उनकी जेब में पड़ा पैसा संघ और उसके अगुवाई करने वालों से कहीं बहुत ही ज्यादा कम।

रही बात, भ्रष्ट और अपराधी की तो, मैं और मेरे कई सारे मित्र साफ सुथरा हैं। उन्हें टिकट कौन देगा, वोट कौन देगा।

इस देश को लोगों को पढ़ा लिखा बस वाद विवाद और कैरियर गाइड के लिये अच्छा लगता है। MLA, MP, CM और PM तो उन्हें उस डब्बे से चाहिये जिसमें खून है, जला हुआ सामान है, खोखा और पेटी है, तस्करी का बारूद है, और सेना के काम आने वाली AK47 है!

हमें कचरा पसंद है, लेकिन प्यार तो हम पढ़े लिखे सफेदपोशों से करना चाहते हैं !

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नीतीश, रामविलास और अवसरवाद

नीतीश, रामविलास और अवसरवाद
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बिहार के दो सबसे बड़े नेता, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान, दोनों ही हद्द दर्जे के अवसरवादी और पलटू। इनका न अगड़ा से लेना है, न पिछड़ा या दलित से, न इनको कट्टर हिंदूवाद से दिक्कत है, न धर्मनिरपेक्षता से।

नीतीश ने एक्सट्रीम लेफ्ट के साथ भी सरकार बनाई है और एक्सट्रीम राइट विंग वाले संघ से भी इश्क़ लड़ाया है। इनका न कोई मोरल है और न कोई आत्मा। गोधरा दंगा के समय नीतीश चुप रहे, लेकिन मोदी और संघ से घिन्न होने का ढकोसला भी किया। बिना पेंदी के लोटा की तरह।

नीतीश का मकसद है कि उनको येन केन प्रकारेण CM की कुर्सी चाहिए। इसलिए इनको कुर्सी कुमार भी बोलते हैं। जब तक RJD पावर में था संघ और दंगों का विस्तार बिहार में लगभग नदारद था। 1990 के समय राम मंदिर मूवमेंट, जो भाजपा के राजनीतिक रोटी सेंकने का जबरदस्त हथियार था और पूरा देश साम्प्रदायिक हिंसा और ध्रुवीकरण की चपेट में था, लालू यादव के कारण बिहार में अछूता था। संघ परिवार अपना शिविर बढ़ा नहीं पाया, लगा नहीं पाया।

नीतीश के समय अब लगभग 4000 संघ के नए शिविर खुले हैं। जहां ध्रुवीकरण की उम्मीद ज्यादा हो वहीं यह अपनी नई शाखा खोलते हैं। अक्सर मुस्लिम बहुल इलाकों के आस पास के गांवों और क्षेत्र में। नतीजा है कि बिहार में अब धार्मिक उन्माद ज्यादा है, और छुटपुट दंगे अक्सर होते रहते हैं। लालू यादव वह कील हैं जो संघ की तेज चाल में चुभते हैं।

जे है से कि, राम विलास पासवान राजनीतिक मौसम के प्रकांड विद्वान। उनको पता होता था कि हवा का रुख किधर है। उधर ही हो लेते थे। कई सारे PM के अंदर मंत्री रहे। उनका मकसद मंत्री बनना था।

नितीश कुमार भी छोटे मौसम वैज्ञानिकों में आते हैं। लेकिन ये मौसम बदलने वाले भी हैं। इनके जैसा बिना मोरल का CM ढूंढने से नहीं मिलेगा। इनसे ज्यादा कायर भी। इनका आजतक कोई स्टैंड क्लियर नहीं रहा।

ये वहीं हैं, जिन्होंने कहा था : “मिट्टी में मिल जायेंगे, लेकिन भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलायेंगे”. अब देखिए, RJD के सौतन के साथ हनीमून मना रहे हैं।

नीतीश कुमार बिना रीढ़ की हड्डी वाले राजनेता हैं !

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#NitishKumar #RamVilasPaswan #LaluYadav #BJP #JDU #RJD

UPSC and Sankalp Foundation

UPSC and RSS Foundation
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In recently announed results by UPSC, 476 of 829 selected are from an institute Sankalp Foundation which is affiliated to RSS. That is 57%

How come UPSC did that ? Imagine 54% of IITians coming from Madarsa. Every moron will cry it as Jihad. This is equavalent of overtaking of institution, administration, maligning the image of UPSC. How will credibility of UPSC stand then ??

RSS is changing the administrative structure for coming 30 to 40 years with the help of these UPSC qualified people !

What will happen with this ? Imagine SP, SSP, and DM of your area is from hardlined RSS. He will discriminate between Hindu and Muslim. He will discriminate between upper caste and lower caste. If a riot takes place, he will take side with Hindu Mob. He will not let them get punished. He will save the local politician who was involved in killing people on the line of caste, religion.

This has happened in Gujarat. This has happened in Mumbai. This has happened when India burned in Ram Mandir movement during 90s. Do you know who have protected Narendra Modi, Amit Shah, Kalyan Singh, LK Advani, Murali Manohar Joshi etcs.

A favourable police and administration helps in hiding crime, arresting innocents in a vindicative manner. This has happened in 1984 in Delhi, 1989 in Bhagalpur, During deadly days of Bloodbath in Bihar during fight of Ranvir Sena and Lower caste Senas.

Police, administration, judiciary and politician, if all of them are of same ideology, you can imagine the threat to democracy. This is a deadly and fearful combination of forces. Include the favorable media and educational institutions, you have overtaken the soul of a country. No one can threaten you. Not even election. That is dictatorship in true sense.

If all this go unreported, without brakes, India is doomed to be fascist regime. We are witnessing that. All the influential dissenters are being arrested, slapped with NSA, UAPA, and Anti terror laws. They are slapped arbitrarily. Delhi police could not arrest Komal Sharma of ABVP but has all the time to prepare lakhs of sheets of proof against Umar Khalid. When world noticed the Delhi Riots of 2020 and Kapil Mishra, he is still roaming free.

This a typical play book of any right-wing fascist regime around the world. And founder of RSS were fond of Nazi in Germany.

कंगना रनौत और सुशांत का न्याय

कंगना रनौत और सुशांत का न्याय

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कंगना रनौत :
On ODD days : मुझे बहुत बुरा लगता है जब कोई मोदी जी का सम्मान नहीं करता। वो इस देश के PM हैं।
On Even days : उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है !
एक दिन में कई शब्दों का प्रयोग। कश्मीरी पंडितों का दर्द समझ सकती हूँ। मेरा घर राम मंदिर है। बाबर के लोगों ने बाबरी मस्जिद बना दी। मुंबई पाकिस्तान हो गया। जय श्री राम !
यह महिला कुछ बड़ा ही खरनाक चीज लेती है। जिससे यह इतना बोलती है। व्हाट्सएप का ज्ञान लेकर। या तो यह पागल है या इसके पीछे बहुत बड़ी ताकत है। जिससे इसको इतनी हिम्मत मिल रही है। यु नो हु।
48 करोड़ के घर मे रहकर, लोगों को टैक्स पेयर के पैसे को बर्बाद करने का ज्ञान देने वाली, बिना किसी वाजिब डर के, Y कैटेगरी की सेक्युरिटी ले रही है, एक स्टेटस सिम्बोलिस्म के लिये।
मामला शुरू हुआ था, सुशांत के लिये न्याय मांगने से। उसका कत्ल हुआ है।नेपोटिसम के कारण। जी भर कर सबको गालियाँ मिली। मैंने भी दी गालियाँ। लेकिन कुछ दिनों में ही लग गया कि मैं गलत हूँ। मेरा गुस्सा जायज है, लेकिन सुशांत की मौत का कारण क्या है नहीं पता।
कंगना ने बोलना शुरू किया। पायल रोहतगी ने बोलना शुरू किया। हर ऐरा गैरा केस सुलझाने में लग गया। कोई पुनीत वशिष्ठ है, जिसके एक फेसबुक पोस्ट ने हंगामा मचा दिया। जब मामला लीगल हुआ तो उसने पोस्ट के नीचे लिख दिया फोरवर्डेड। उसकी जिम्मेदारी खत्म।
सुशांत के परिवार ने केस दर्ज किया। कि उसकी हत्या हुई है। 15 करोड़ का हेर फेर हुआ है। रिया उसकी GF थी, वो फँस गयी। फिर शुरू हुआ घिनौना खेल। पता चला कि वो ड्रग लेता था, एक दशक से मानसिक बीमार था। 15 करोड़ भी नहीं मिले थे उसे। नेपोटिसम का शिकार भी नहीं था। रिया फसती गयी। राजनीति का मोहरा बन गयी। और उसका परिवार जेल में है।
केस हुआ था हत्या और पैसे की लूट का। बन गया ड्रग का। यदि रिया उन सब की तरह ड्रग लेती है और अकेले जेल में है, तो क्या सुशांत की आत्मा को शांति मिलेगी? क्या उसकी आत्मा उसे माफ़ कर पायेगी, जिसकी फूंकने की वजह से एक परिवार को सूली पर चढ़ाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में कंगना केवल अपनी रोटी सेंकती रही। वो बोलती है। कुछ भी बोलती है। लगातार बोलती है। उसे लगता है कि उसको बहुत कुछ पता है। ऐसा अक्सर व्हाट्सएप वाले ज्ञानी के साथ होता है। उसने मणिकर्णिका की तो उसे लगता है वो झाँसी की रानी है। वह भूल गयी कि वह कोठे वाली रज्जो भी बनी थी। सौ चूहे खा कर बिल्ली चली हज को।
इस पूरे हो हल्ला में, सुशांत का मामला पीछे हो गया। कंगना ने इसे हाईजैक कर लिया। अपने न्याय और अन्याय का मामला बना दिया। महाराष्ट्र सरकार को गालियां दी। क्रिटिसिज्म ठीक है। लेकिन जहाँ से तुमने अपना वजूद बनाया उसे पाकिस्तान कहना बेशर्मी की इंतेहा है।
कंगना यह भूल गयी है कि राजनीति में कोई भी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। राजनीति में 2 प्लस 2 कभी 4 तो कभी 3 तो कभी 2 भी होता है। उसे लगता है कि अमित शाह, मोदी और भाजपा का IT सेल मेहरबान है। बिल्कुल है। क्योंकि GDP 24% गिरा है, कोरोना से लाखों लोग ग्रसित हैं, करोड़ो लोग बेरोजगारी और भुखमरी से।
अब थाली और ताली बजाना काम नहीं आ रहा। अर्णब, सुधिर, रुबिका, नाविका, अंजना, अमिश, रजत, दीपक इत्यादि अपना 24/7 काम कर रहें हैं। ताकि मुद्दों पर बात न हो। इसमें सबसे मुखर अभी कंगना है।
लेकिन कल किसने देखा है। कल को अमित शाह और उद्धव ठाकरे एक साथ मातोश्री में काश्मीरी पुलाव और पंजाबी रायता खाते मिल जायेंगे। उस दिन कंगना को अपने इश्तेमाल होने का अहसास होगा। उस दिन उसे आदित्य पंचोली अच्छे लगेंगे। और गुस्से से सिर फटने को होगा।
राजनीति घाघ लोगों का खेल है। यदि कंगना को लगता है कि वो समझ गयी है। तो यह उसकी नीरा मूर्खता है। राजनीति समझने के लिये इसमें उतरना जरूरी है। तभी मोल भाव समझ में आयेगा। संजय दत्त, अमिताभ बच्चन जैसे मेगा स्टार अपना हाथ आजमा चुके हैं। फिर अपनी रंगीन नकली दुनिया में वापस चले गये।
कंगना का भ्रम भी देर सवेर टूटेगा। और अरमान के टूटने पर बहुत दर्द होता है। उम्मीद है कि यह दर्द सुशांत जैसा न हो।
तब तक आप कंगना नाम की नई राखी सावंत और ड्रामा क़वीन के जुमलों और गमलों का लुत्फ उठाइये।

राम मंदिर, राजनीति और मोदी

5 अगस्त को राममंदिर का भव्य भूमि पूजन हुआ। नरेंद्र मोदी और सारे बड़े नेता वहाँ पहुंचे। देश भर में रामभक्तों ने उत्सव मनाया। सारे टीवी चैनल धार्मिक चैनल बन गए थे।इसी बीच कोरोना केस लगभग 20 लाख पार हुआ और देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या लगभग 42 हजार पार हो गई। रोज लगभग 50 हजार से ज्यादा केेेस आ रहे हैं।

लेकिन प्रश्न है कि जनता फिर इतना आनंदित क्यूँ है ? इस त्यौहार में वो प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं जिनकी जिंदगी तबाह हो गयी।
इन सबका उत्तर है धर्म और उसका नशा। आदमी को नशे की लत लग जाये तो सब दुःख सुख भुला कर उसे वही अच्छा लगता है। इसमें प्रचारक, प्रचार तंत्र का दोष है? बिल्कुल है !
यदि इतना ही भव्य हॉस्पिटल या यूनिवर्सिटी या रिसर्च लैब खुलता, तो क्या मीडिया इतना उत्सव मनाता, लोग इतना तवज्जो देते?आप मोदी और भाजपा को दोष देकर खुश हो सकते हैं। लेकिन असली जड़ जनता है। क्या वो इतना खुश होती ये सब देखकर ?
याद रखिये, जब दुनिया में लाखों लोग मर चुके हैं और मर रहे हैं तब मंदिर,मस्जिद,चर्च और गुरुद्वारे बन्द थे , हाथ ऊपर कर लिया था ईश्वर ने, अल्लाह ने।
इंसान के काम आते हैं यूनिवर्सिटी, अस्पताल, रिसर्च सेंटर इत्यादि। धार्मिक स्थल धर्म और डर के व्यापार के गढ़ हैं।
एक अनंत पॉवर में आस्था रखिये, जिसने ब्रह्मंड बनाया और चलायमान रखा है। यह तय है कि वो इन जगहों पर नहीं रहता। यहाँ तो हर तरह के सुकर्म और कुकर्म होते हैं।
और अंत में :
“बोलो, सियावर रामचंद्र कि जय”#RamMandir #RSS #BJP #Hinduism #Religion #Hindu #NarendraModi #Advani

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