कटेंगे तो बटेंगे

वो तुम्हें अलग अलग,
नारों में उलझा रहा है,
और अपनी नाकामियों को,
बहाने से झुठला रहा है।

उसे बस तुम्हें ग़रीबी और,
जीवन के संघर्ष में उलझाना है,
धर्म के कट्टरवाद में,
एक दूसरे को लड़ाना है।

उसे बस कुर्सी पाना है,
नए झूठ का जुगाड़ लगाना है
और अपने अमीर दोस्तों का ,
लाखों करोड़ माफ करवाना है ।

इतने में ही उसकी कहानी है,
झूठ और नफ़रत ही दाना पानी है ।

: बिहारी चौपाल

इंसानी खून

हिरणों और मोरों का,
कोई धर्म नहीं होता साहिब।

मैं धार्मिक नफरत का सौदागर हूँ,
मुझे इंसान में ही,
अपनी खेती दिखती है।
इंसानी खून को,
मैं सीढ़ी बनाकर
इतना ऊपर पहुंच जाता हूँ,
जहाँ न उनकी रुदन सुनाई देती है,
न उनका श्राप या संताप
कुछ बिगाड़ सकता है मेरा।

मेरे संबल हैं वो करोड़ो लोग,
जो उतने ही नफरती,
और जहरीले हैं।
लेकिन उनके यहाँ भी,
पालतू जानवरों से,
बहुत प्यार किया जाता है।
मेरी ऊर्जा और ऑक्सीजन,
के स्रोत हैं, शक्ति है, मुक्ति हैं।

मैं एक धर्मयुद्ध लड़ रहा हूं
मेरी नफरत ही मेरा नश्तर है!

घंटा विकास

घंटा विकास
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जय बोलो, जय बोलो गईया की जय बोलो
मत बोलो, मत बोलो, तो भईया टै बोलो !
गोबर खाओ, गौमूत्र पियो और मदिरा का पान करो !
मुल्ला मारो, भगवा पहनो, हिन्दू का सम्मान करो !
दो टके की बुद्धि लेकर कुर्सी पर चढ़ जाओ !
कुटम-कूट मचा के भैया संसद की गरिमा बढ़ाओ !
गाली देना धरम है भैया, खून पीना रीत है !
अपना तो चांदी-सोना, ससुरी जनता भयभीत है !
शहर है गन्दा, गावं है गन्दा, सफाई का बजट तुम्हारा है
बच्ची जमुनिया कचरा बीने,पढ़ो-बढ़ो का नारा है !
गाय हो खाते ,भैंस हो खाते हिन्दू-मुस्लिम का नारा
छोड़ दे मुल्ला, देश हमारा, हमरे बाबूजी को प्यारा !
पलटू लोग की चांदी है, अब हर खेत चुगने जाते हैं
भारतमाता को लूट के ससुरे, गज़ब डकार लगाते हैं !
घंटा बजाओ देश बढ़ेगा, हम्मर 56 इंच का सीना है !
बने रहो बकलोल, की भैया ताऊ बड़ा कमीना है !
झूठ बोल कर देश बढ़ाये, दुनिया भर की सैर करे
कालाधन तड़ीपार हो गया,नया सवेरा खैर करे !
मोटा भाई, दाढ़ी भाई दोनों मुल्ला के पीछे हैं
प्राची,ज्योति,साक्षी, महेश के डोर ठीक से खिच्चें हैं !
गज़ब कर रहा देस बिकास , अँखियाँ चोन्हराये दिन में !
भकोल कबिया बइठल बथानी में, कहे कबिता खिन्न में !
Copyright@Arun Bharti

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