दिल करता तुमको नशीली ग़ज़ल लिखूं.
नाजनीन कहूँ या खिलता कमल लिखूं.
चांदनी कहूँ या ताजमहल लिखूं.
बेवफा कहूँ या वफ़ा का पल लिखूं.
हूर कहूँ या उर्वशी का दल लिखूं.
ये मिज़ाजे इश्क हैं,इश्क के आगोश में हूँ.
इश्क को महक लिखूं या कोई दलदल लिखूं.
@ Arun Bhati