हमें कचरा पसन्द है !

हमें कचरा पसन्द है!
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31 साल का तेजस्वी यादव अकेले नीतीश कुमार, सुशील मोदी, नरेंद्र मोदी, संघ संगठन और भाजपा जैसी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के 40 से 50 साल के पोलिटिकल कैरियर पर भारी पड़ता है।

लालू यादव परिवार में लाख बुराईयां हों, लेकिन यह भी सच हैं कि ये बुराईयां सब में है, और जिनका नाम ऊपर है उन लोगों से कम है। और सबसे बड़ी बात यह है कि इन्होंने संघ के हाथी जैसे एजेंडे के आगे सिर नहीं झुकाया। ऐसी और पार्टी का नाम बताइये।

जगन्नाथ मिश्रा के समय से चला आ रहा घोटाला जो कुल जमा लगभग ₹900 करोड़ का था यदि सृजन घोटाले के ₹3000 करोड़ से अधिक है, मुज्जफरपुर के बालिका शेल्टर होम बलात्कार से जघन्य है तो फिर आपका गणित और चरित्र दोनों गड़बड़ है।

चारा खाये मिश्रा जी और चारा चोर हुवा यादव। क्योंकि संघ जैसे सांड को उसकी सिंग से पकड़कर पटकने वाला आजकल जेल में है। और उस सांड की हार से उन सबको दर्द होता था जो जातिवादी ऐड़ी उठाकर ऊँचा होते थे और सांड के तहसनहस करने पर उत्सव मनाते थे।

राजद, तेजस्वी और लालू यादव का चरित्र संघ से बेहतर है। और उनकी जेब में पड़ा पैसा संघ और उसके अगुवाई करने वालों से कहीं बहुत ही ज्यादा कम।

रही बात, भ्रष्ट और अपराधी की तो, मैं और मेरे कई सारे मित्र साफ सुथरा हैं। उन्हें टिकट कौन देगा, वोट कौन देगा।

इस देश को लोगों को पढ़ा लिखा बस वाद विवाद और कैरियर गाइड के लिये अच्छा लगता है। MLA, MP, CM और PM तो उन्हें उस डब्बे से चाहिये जिसमें खून है, जला हुआ सामान है, खोखा और पेटी है, तस्करी का बारूद है, और सेना के काम आने वाली AK47 है!

हमें कचरा पसंद है, लेकिन प्यार तो हम पढ़े लिखे सफेदपोशों से करना चाहते हैं !

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नीतीश, रामविलास और अवसरवाद

नीतीश, रामविलास और अवसरवाद
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बिहार के दो सबसे बड़े नेता, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान, दोनों ही हद्द दर्जे के अवसरवादी और पलटू। इनका न अगड़ा से लेना है, न पिछड़ा या दलित से, न इनको कट्टर हिंदूवाद से दिक्कत है, न धर्मनिरपेक्षता से।

नीतीश ने एक्सट्रीम लेफ्ट के साथ भी सरकार बनाई है और एक्सट्रीम राइट विंग वाले संघ से भी इश्क़ लड़ाया है। इनका न कोई मोरल है और न कोई आत्मा। गोधरा दंगा के समय नीतीश चुप रहे, लेकिन मोदी और संघ से घिन्न होने का ढकोसला भी किया। बिना पेंदी के लोटा की तरह।

नीतीश का मकसद है कि उनको येन केन प्रकारेण CM की कुर्सी चाहिए। इसलिए इनको कुर्सी कुमार भी बोलते हैं। जब तक RJD पावर में था संघ और दंगों का विस्तार बिहार में लगभग नदारद था। 1990 के समय राम मंदिर मूवमेंट, जो भाजपा के राजनीतिक रोटी सेंकने का जबरदस्त हथियार था और पूरा देश साम्प्रदायिक हिंसा और ध्रुवीकरण की चपेट में था, लालू यादव के कारण बिहार में अछूता था। संघ परिवार अपना शिविर बढ़ा नहीं पाया, लगा नहीं पाया।

नीतीश के समय अब लगभग 4000 संघ के नए शिविर खुले हैं। जहां ध्रुवीकरण की उम्मीद ज्यादा हो वहीं यह अपनी नई शाखा खोलते हैं। अक्सर मुस्लिम बहुल इलाकों के आस पास के गांवों और क्षेत्र में। नतीजा है कि बिहार में अब धार्मिक उन्माद ज्यादा है, और छुटपुट दंगे अक्सर होते रहते हैं। लालू यादव वह कील हैं जो संघ की तेज चाल में चुभते हैं।

जे है से कि, राम विलास पासवान राजनीतिक मौसम के प्रकांड विद्वान। उनको पता होता था कि हवा का रुख किधर है। उधर ही हो लेते थे। कई सारे PM के अंदर मंत्री रहे। उनका मकसद मंत्री बनना था।

नितीश कुमार भी छोटे मौसम वैज्ञानिकों में आते हैं। लेकिन ये मौसम बदलने वाले भी हैं। इनके जैसा बिना मोरल का CM ढूंढने से नहीं मिलेगा। इनसे ज्यादा कायर भी। इनका आजतक कोई स्टैंड क्लियर नहीं रहा।

ये वहीं हैं, जिन्होंने कहा था : “मिट्टी में मिल जायेंगे, लेकिन भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलायेंगे”. अब देखिए, RJD के सौतन के साथ हनीमून मना रहे हैं।

नीतीश कुमार बिना रीढ़ की हड्डी वाले राजनेता हैं !

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