न मैं कविता गढ़ता

तुम मेरे पास होती तो ये खास होता.
गर तुम उदास होती तो मैं उदास होता.
न तुम तन्हा सहती,न मैं तन्हा रहता.
न तुम कविता पढ़ती,न मैं कविता गढ़ता.

------------- अरुण भारती 'चिंतित'

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