रास्ता भटकना भी जरूरी है,
औकात का पता चलता है,
अपने और दूसरों के,
जज़्बात का पता चलता है।
मंज़िल पहले मिल जाती है,
अपने अंदर के डर और हिम्मत से,
और रूबरू हो जाते हैं,
अपने को थोड़ा और मजबूत पाते है।
जो सोचा नहीं था, वो हो जाता है,
इंसान अपने को बेहतर पाता है।
भटकने से कभी घबराना नहीं,
नए मोड़ लेने से कतराना नहीं,
भटकर भी मंजिल जल्दी पाओगे,
जीवन में नए नए मुकाम बनाओगे।
: बिहारी चौपाल
