भक्त होना

पढ़ना लिखना बहुत खतरनाक होता है। थोड़ा बहुत पढ़ लिख कर भक्त होना और खतरनाक। ऐसा ऐसा तर्क मिलेगा की माथा पकड़ लोगे। और कहीं काफ़ी पढ़ा लिखा भक्त मिल गया, तो समझिये हिरोशिमा पर गिरने वाले बम से भी भारी !

JNU Protest

JNU का नाम आते ही सारे टैक्स देने वाले जाग जाते हैं। बड़े बेरहम सवाल करते हैं। क्या इतने जोर शोर से आपने अपने नेता से सवाल पूछा है। वो हजारों करोड़ का घोटाला करते हैं। इस महंगाई के दौर में भी उन्हें 30 रुपये में भरपेट खाना मिलता है संसद की कैंटीन में। उसका रेट देख लीजिये।आपकी जानकारी के लिये बता दूं, नार्थ कोरिया में भी एडुकेशन और हेल्थकेयर सरकार फ्री देती है। अब बताईये !

बिहार : मुश्किलें और मज़बूरी

कल ये लिख रहा था. डायरेक्ट फेसबुक पर. फ़ोन हैंग हुआ और मैं खिन्न हो गया. फिर से कोशिश।
ये बात थोड़ी अचंभित करेगी आपको लेकिन सत्य है. मैंने दुनिया ज्यादा नहीं देखी  है.जब भी कहीं जाने का मौका मिलता है, वो जगह नयी होती है मेरे लिए. मैं जहाँ भी जाता हूँ, खुश और दुखी होता हूँ. वहां की अच्छाई लिखता हूँ और साथ ही अपने बिहारी होने का दर्द भी. यकीं मानिये ये दर्द बहुत भयानक होता है.
सब लोग कहते हैं की बिहार पिछड़ा है, बिहारी देश विदेश मजदूरी करने जाते हैं. इसमें सबकुछ सत्य है. इसलिए ज्यादा चोट करता है. BIMARU states में बिहार, MP, UP, और राजस्थान आते हैं. बिहार तथाकथित जंगल राज के लिए जाना जाता है. MP वह राज्य है जो बलात्कार, अब तक के सबसे भयानक हत्या के syndicate वाला VYAPAM और आदिवासियों के उत्पीड़न के लिए जाना जाता है. राजस्थान जाटों का गढ़ है, जहाँ भंवरी देवी जैसी विश्व कुख्यात घटनाएँ हुवी हैं. यहाँ अक्सर दलितों का उत्पीड़न जाटों द्वारा, की न्यूज़ आती है. UP पिछले एक दो साल से ज्यादा चर्चा में है. 2017 ज्यादा दूर नहीं है. western UP जाटों का गावं है. वहां न्यूनतम अधिकार भी नहीं है गरीब और दलितों के पास. 2013 में दंगे में जो मुस्लमान मारे गए वो बहुत गरीब और खेतिहर मजदुर थे. हरियाणा तो खैर हमेशा से उदंड रहा है ऐसे मामलों में.
बिहार की बात करें तो यहाँ जाति आधारित नरसंहार हुआ है. मेरे बहुत से मित्र हैं जिनके रिश्तेदार रणवीर सेना में थे।  इन पढ़े लिखे लोगों को भी कतई अफ़सोस नहीं रहा है. लालू यादव जो “ललुआ”, ” भलुआ” हुआ करते हैं बड़कों के लिए, ने ऐसा कुछ किया है जो वहां रहने वाला और भुक्तभोगी ही समझ सकता है. जहाँ क्रिमिनल को दबंग कहा जाये और सीना तान कर परिचय कराया जाये, वहां से एक ग्वाले का बेटा गरजता है तो बहुत दबे कुचले का सीना चौड़ा हो जाता है. यदि आप दूसरी  तरफ के हैं तो  आपको यकीं नहीं होगा, मुझे गाली भी देंगे और बेवकूफ कहेंगे। सब शिरोधार्य है.
लालू ने सामाजिक संरचना को बहुत सलीके से समझा है. इसी का नतीजा है की सब exit पोल फेल हो जाते हैं और इनका 190 सही हो जाता है. निसंदेह लालू ने चारा घोटाला किया. लेकिन जगनाथ मिश्रा को लोग भूल जाते हैं. लालू corruption के सिंबल हैं. क्यों ? क्या व्यापम इससे बड़ा नहीं है ? नयी नयी आई पंकजा मुंडे ने 200 करोड़ का चपत लगाया उसकी चर्चा है ? कलमाड़ी का 75000 करोड़, राजस्थान का 4 लाख करोड़, जोगी, तेलगी को भूल जाते हैं. बंगारू को भूल जाते हैं. बोफोर्स को भूल जाते हैं. मधु कोड़ा को भूल जाते हैं. खानदानी corrupt मारन परिवार, करूणानिधि परिवार को भूल जाते हैं ? मराठा क्षत्रप शरद पवार की हजारों कंक्रीट की इमारतों को भूल जाते हैं जो मुंबई में चमक रही हैं. यह वो इंसान है जो world sugar trade को 2 मिनट तक रोक सकता है. फिर लालू ही सबसे भ्रष्ट क्यों ?
कारण है. दोगली मीडिया। जहाँ आज भी बड़कों की पकड़ है. लालू जिसे openly मंच से गाली देते थे। यह सच है की बिहार को अंधेर करने में इनके गुर्गों का बड़ा हाथ है. शोरूम से गाड़ियां निकल लेते थे, लोगों का शाम के बाद निकलना खतरे से खाली नहीं था. मुझे नफरत थी इस इंसान से.लेकिन बड़े होने पर बहुत कुछ पता चला है. पवार पर कोई हाथ क्यों नहीं लगाता ? क्यूंकि वो भी जेटली की तरह लामबंदी का माहिर खिलाडी है.
अब आते हैं की अब लालू वापस आये हैं लाव-लश्कर के साथ तो क्या डरने की जरुरत है ? मेरे ख्याल से नहीं। क्यूंकि ये उनके survival का सवाल था. उनको सिख मिल चुकी है. ज़माना बदल गया है. हमेशा डाल-डाल और पात-पात  के खेल में आगे रहने वाले को इतनी समझ जरूर है. कमान अब तेजस्वी के हाथों में सौपा जा चूका है और अब मोदी की रथ यात्रा देशभर में निकालने को ये देशी दबंग तैयार है. इसका आगाज़ बनारस से होना है जहाँ के गंगा मैया को छला है बड़बोले मोदी ने.
लालू ने बिहार को तब हाईजैक किया था जब राबड़ी देवी को थोपा था. इस जले से उबरे नहीं थे की बिहार का विभाजन हो गया. बच गया केवल खेत खलिहान वाला बिहार. और अनिश्चितता। धन्यभाग की नितीश मिले और पटरी साफ़ हो रही है.
बिहार पिछड़ा है और कई जगह ये गाली जैसा है. इसमें कोई दो राय नहीं है. आज भी हर शहर में बिहार के बंधू मिल जायेंगे। रिक्सा चलते, फुटपाथ पर सोते, और बदतर हालत में रहते। ट्रैन में भीड़, मेट्रो में भीड़, मुंबई लोकल ट्रैन में भीड़ सब जगह देखें जा सकते हैं. लेकिन यह भी है की सबसे ज्यादा IAS, इंजीनियर, डॉक्टर, IITians भी हमारे बन्धु हैं. हम पॉश या एवरेज से अच्छी जगह रहते हैं, काम करते हैं, लोकल लोगों को रोजगार देते हैं, उनके रोटी का इंतेज़ाम करते हैं। जब हम गन्दी बस्ती से गुजरते हैं तो नाक पर रुमाल रख लेते हैं. दिल्ली में ढाबा पंजाबी चलाते हैं, ठेली वो भी लगाते हैं. और दिन भर मख्खी मारते रहते बेरोजगार मकान मालिक इन मजदूरों के शोषण से अपने घर का चूल्हा जलाते हैं.दिल्ली सरकार इनके बुते बनि. लक्ष्मीनगर, मुख़र्जी नगर और JNU  हमारा है.लेकिन ये भी सच है की हमारे बिहारी मजदुर भाई को डांट और थप्पड़ पड़ता है और मजबूरन हमें चुप रहना पड़ता है.
कमी कहां है ? कमी है. हम लोगों में business सेंस कम है. हम नौकरी के पीछे भागते हैं. फिर पलायन और प्रवास कैसे रोक सकते हैं. गुजरात को जैन और गुजरातियों ने आगे किया. महाराष्ट्र को भी बनाया। देश के बड़े उद्योग पर साउथ इंडियन , मारवाड़ी, पंजाबी, जैन और ऐसे ही सब का कब्ज़ा है. बॉलीवुड भी पंजाबी, बंगाल और गुजराती चलाते हैं. मतलब, की कमी अपने में है. जब एक अच्छा खासा पढ़ा लिखा लड़का दिल्ली आता है तो आधी कमाई गुजर बसर करने में लगा देता है. वही, यहाँ का 15 साल का लौंडा business में हाथ लगाता है और जब पैसे कमाने लगता है तो तीर भेदता है की तुमने पढ़ के क्या कर लिया।
अब आते हैं मूल बात पर. बिहार में एक भी ऐसा शहर नहीं है जिसके साफ सुथरे और सुन्दर होने पर हमें नाज़ हो. हर राज्य में ऐसे अनेक शहर हैं जहाँ घूम कर अच्छा लगता है. कई तो BIMARU राज्य में हैं. नितीश जी ने पटना तक को अच्छा नहीं किया. वहां धूल ही धूल है. गांधी मैदान तो गन्दगी का सिरमौर है. ऐसा एक दो शहर तो बनायें कम से कम. यहां की शिक्षा व्यवस्था की बात आये तो नक़ल करते, चार-दिवारी फांदते लोग हमारी किरकिरी करते हैं. शिक्षा मित्र अनपढ़ से भी बदतर होने का प्रमाण देते हैं.
अब अंतिम बात. क्या सबके लिए लालू दोषी है ? नही. फिर उन बिहार केसरी और जननायक ने क्या किया ? उन्हें क्यों नहीं गाली देते ? यही जातिवाद है, जो हमें डुबो रहा है. जब देश 90 % पिछड़ों और दलितों का है तो बिहार कैसे अपवाद हो. उनके हित को धयान में रखने वाला कैसे नहीं जीतेगा ? क्या मोदी और उनके गुर्गे जीत जाते तो अच्छा था ? उनकी candidates की लिस्ट देखिए. एक नंबर के छटें हुवे गुंडे बदमाश को प्रत्याशी बनाया था. वो जीत कर आते तो क्या आतंक नहीं मचाते। क्या वो गुंडाराज नहीं होता। क्या वो जंगलराज नहीं होता। बिलकुल होता. साथ में होता मंदिर, गाय, गोबर और मुहफटो की नौटंकी। देश में क्या कम विकास किया है इन भज भाजियों ने ?
निष्कर्ष ये है की. बिहार का फेल होना आज का नहीं है. यह सोच का फेल होना है. collective failure है. एक बिहारी होने के नाते इसका उपाय ढूंढे और शर्म को ओढें. ना की ओछी मानसिकता और दम्भ के चूर होने का मातम मनाएं. इस हमाम में सभी नंगे हैं. सबसे ज्यादा नंगे वो हैं जो खून की खेती करते हैं और लाशों का नाश्ता करते हैं. उनकी जयकार करनी बंद करें। अच्छा और उचित पढ़े, ताकि सोच, इन नेताओं के झांसे में ना आये, ग़ुलाम ना हो !
एक बिहारी के नाते, मन में बहुत दुःख है की :
सबके घर में चोर हुवे पर सबका बहुत विकास हुआ
कैसे कैसे चोर हुवे, जो पाटलिपुत्र इतिहास हुआ !
साभार !
अरुण भारती “चिंतित”

घंटा विकास

घंटा विकास
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जय बोलो, जय बोलो गईया की जय बोलो
मत बोलो, मत बोलो, तो भईया टै बोलो !
गोबर खाओ, गौमूत्र पियो और मदिरा का पान करो !
मुल्ला मारो, भगवा पहनो, हिन्दू का सम्मान करो !
दो टके की बुद्धि लेकर कुर्सी पर चढ़ जाओ !
कुटम-कूट मचा के भैया संसद की गरिमा बढ़ाओ !
गाली देना धरम है भैया, खून पीना रीत है !
अपना तो चांदी-सोना, ससुरी जनता भयभीत है !
शहर है गन्दा, गावं है गन्दा, सफाई का बजट तुम्हारा है
बच्ची जमुनिया कचरा बीने,पढ़ो-बढ़ो का नारा है !
गाय हो खाते ,भैंस हो खाते हिन्दू-मुस्लिम का नारा
छोड़ दे मुल्ला, देश हमारा, हमरे बाबूजी को प्यारा !
पलटू लोग की चांदी है, अब हर खेत चुगने जाते हैं
भारतमाता को लूट के ससुरे, गज़ब डकार लगाते हैं !
घंटा बजाओ देश बढ़ेगा, हम्मर 56 इंच का सीना है !
बने रहो बकलोल, की भैया ताऊ बड़ा कमीना है !
झूठ बोल कर देश बढ़ाये, दुनिया भर की सैर करे
कालाधन तड़ीपार हो गया,नया सवेरा खैर करे !
मोटा भाई, दाढ़ी भाई दोनों मुल्ला के पीछे हैं
प्राची,ज्योति,साक्षी, महेश के डोर ठीक से खिच्चें हैं !
गज़ब कर रहा देस बिकास , अँखियाँ चोन्हराये दिन में !
भकोल कबिया बइठल बथानी में, कहे कबिता खिन्न में !
Copyright@Arun Bharti

मोदी और मीडिया

जिस तरह का जोश-जूनून है मोदी के लिए वो देखने लायक है. एक ज़माना था जब बाजपेयी जी बहुत प्रसिद्ध हुआ करते थे . पक्ष-विपक्ष सबसे बराबर सम्मान मिलता था.बीजेपी के एकलौते ऐसे नेता थे जो मुझे आजतक पसंद हैं. इंदिरा गांधी ने अपने खून का आखरी बून्द भी देश के लिए दिया. ये उन्होंने कहा था.उनकी गज़ब की प्रसिद्धि थी. राजीव गांधी ने भी अपना बलिदान ही दिया. वजह जो भी हो, व्यक्तिगत कारणों से उन्हें नहीं मारा गया.मुझे याद है जब उनको बम से उड़ाया गया तो मेरे पापा लगभग रो पड़े थे.उन्होंने उस दिन ठीक से खाना भी नहीं खाया।
आज की दीवानगी का कारण सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जबरदस्त बाज़ारीकरण है. रियलिटी शो जैसा चलने की होड़ है. इसमें कई बार एक बेकार सी, ना अहमियत वाली न्यूज़ भी दिन भर-रात भर ब्रेकिंग न्यूज़ बनी रहती है. जबकि उस समय तो केवल रेडियो था ज्यादातर के पास. उस समय यदि ये सब होता तो नेहरू, इंदिरा और राजीव के लिए दीवानगी देखने लायक होती।
यह गला फाड़-फाड़ कर बताया जा रहा है की कांग्रेस ने केवल बर्बाद किया है,लूटा है. मैं नहीं मानता। मेरे गावं और उसके आस पास के सब गरीब गुरबा का घर इंदिरा आवास से बना है. मैं IIT Kharagpur से पढ़ा हूँ जो नेहरू का सपना था. मैं JNV Gopalganj से पढ़ा हूँ, जो राजीव जी का सपना था.
एक वाक्या है. जब राजीव के मन में नवोदय का प्लान आया तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री को देर शाम को या रात को बुलाया और कहा की इसे लागु करो. बस 5 मिनट में गावं के 75% छात्रों का भविष्य अच्छा करने का फरमान जारी हो गया. उस सपने की एक उपज, ये लिख रहा है. मेरे गावं और वहां के आसपास का रोड भी चकाचक है. वो भी इनकी ही देन है शायद !
आजकल मेरे बिजली का बिल आधा आता है. पानी का बिल तो आता ही नही. बहुत कुछ बदल गया है. पिछले सालोँ में दिल्ली फ्लाईओवर से पट गया है. यहाँ का विवेक विहार चकाचक है. पता चला ये शीला ताई की देन है.
कहने का मतलब ये हैं की, कुछ लोग होते हैं जो कुछ ऐसा करते हैं, जो डायरेक्टली आपको टच करता है. आप उसके मुरीद कैसे नहीं होंगे. ऐसी ही कुछ भविष्य में उम्मीद है जो मुझे जीने के बेहतर और आसान तरीके दे. ताकि मन खुश और सीना चौड़ा हो जाये।
खैर ! काश फेसबुक, ट्विटर और कानफोड़ू मीडिया उनके ज़माने में होती, तो दीवानगी की एक दो और फिल्म देखने में बड़ा मजा आता !

Copyright@ Arun Bharti

तस्मै श्री गुरुवे नमः

जब मेरा नवोदय में जाना तय हो गया था, मुझे याद है एक महीने से मेरी माँ रो रही थी.मैं अक्सर रात में पढ़ते पढ़ते सो जाया करता था। फिर वो पानी डालकर या गुदगुदी कर मुझे जगाती थी खाना खिलाने. उसे यही चिंता थी की मुझे कौन जगायेगा खाना खाने के लिए. लेकिन मुझे गावं और गरीबी से निकलने का अवसर मिला था.मैंने इतनी छोटी उम्र में भी “पेटी ” भर लिया था. 6अक्टूबर 1995 को जब आया तो बड़ा अच्छा लगा. पापा को अलविदा कह स्कूल हॉस्टल चला गया.शाम को थावें वालों का पूरा परिवार साथ देने आया था. मेरा अपना परिवार, स्कूल हो गया था. सुन्दर राजकिरण को रोते हुवे देखा तो उसे मनाने और समझाने लगा. रश्मि मैडम सब रोते बच्चों को मना रही थीं. सर लोग भी मना रहे थे। इस तरह सब बच्चों को नया घर-परिवार-मम्मी -पापा मिल गए। यही संसार सुख दुःख और बेहतर बनाने का साथी रहा 2000 तक. आजतक है. जबतक ज़िंदा हैं रहेगा।

मुझे याद है S N झा सर का सबको डांटना फटकारना दुलारना।गीता मैडम, रूपम मैडम,मुकेश सर, का ये चिंता करना की इस निर्दयी दुनिया में ये भोला बालक कैसे गुजर बसर करेगा ? ! मुझे याद है गीता मैडम और रूपम मैडम को मुझे घसीटते हुवे मेस ड्यूटी पर ले जाना। मुझे वो फल, वो मिठाईयां, वो प्यार और मेरे लिए चिंता याद है. मेरे कांपते हाथों, धड़कते दिल को ढांढस बढ़ाना और सम्भालना याद है. रोना – रुलाना भी याद है. मेरे घर से दूर का वो दूसरा घर संसार याद है जिसने मेरे बाजुओं में इतनी ताक़त, दिल में इतना हौसला, मन में इतने अरमान, ज़िन्दगी में इतने उड़ान दिए।

लिखता चलूँ तो आंसुओं का समंदर लिख दूँ, प्रेरणा का पर्वत लिख दूँ, प्यार-वात्सल्य का पुराण लिख दूँ।

गीता मैडम, मुकेश सर, विनय सर, गोपाल सर, बायो सर, आर्ट सर, प्रिंसपल सर, रश्मि मैडम, रूपम मैडम, मेरे प्राथमिक विद्यालय के कमला सर, हाई स्कूल के आलम सर, IIT के समस्त गुरुजन, और बचपन में ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाने वाले, लिखना सिखाने वाले, बोलना सिखाने वाले मेरे माता – पिता, आप सबका प्यार, आशीर्वाद है की आज मैं जहाँ भी हूँ और ऊँचा उठने की तमन्ना रखता हुँ. आभार और शाष्टांग नमन !

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु :,गुरुरेव महेश्वरः |
गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ||

अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम ।
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥

मातृवत लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका ।
नमोअस्तु गुरुसत्तायै, श्रद्धा – प्रज्ञायुता च या ॥

ॐ श्री गुरुवे नमः

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