कटेंगे तो बटेंगे

वो तुम्हें अलग अलग,
नारों में उलझा रहा है,
और अपनी नाकामियों को,
बहाने से झुठला रहा है।

उसे बस तुम्हें ग़रीबी और,
जीवन के संघर्ष में उलझाना है,
धर्म के कट्टरवाद में,
एक दूसरे को लड़ाना है।

उसे बस कुर्सी पाना है,
नए झूठ का जुगाड़ लगाना है
और अपने अमीर दोस्तों का ,
लाखों करोड़ माफ करवाना है ।

इतने में ही उसकी कहानी है,
झूठ और नफ़रत ही दाना पानी है ।

: बिहारी चौपाल

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Website Powered by WordPress.com.

Up ↑