कोरोना और लाखों मौतों का जिम्मेदार कौन!

कोरोना और लाखों मौतों का जिम्मेदार कौन?
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भारत में इतनी मौतें और ऐसी भयंकर हालात का सबसे बड़ा जिम्मेदार वोटर है। 70 सालों से हम अनपढ़, कम पढ़े लिखे, अपराधी, डॉन, दंगाई और अपनी जाति का है, इस नाम पर इनको वोट देते रहे। इन्होंने अपने लिए फॉर्म हाउस खरीदे, अकूत संपत्ति बनाई, हजारों लाखों की हत्या करवाई। लेकिन इनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सका। जनता ने फिर इन्हें ही चुना। मंदिर, मस्जिद, जाति,भाई चारा, के नाम पर चुना। कोई भी पढ़ा लिखा, साफ सुथरा, अच्छी नियत का उम्मीदवार जब भी लड़ा, उसकी जमानत ज़ब्त करवा दी।

आज जब पूरा देश कोरोना से त्राहि त्राहि कर रहा है तब यही नेता घर में दुबक कर बैठे हैं। खुद भी मर रहे हैं। लेकिन कोई प्लान, कोई सहायता करने लायक नहीं हैं। मूर्ख अक्सर ऐसा ही करता है।

इस संकट में सब लोग अपनी व्यक्तिगत ताक़त और सोर्स लगा रहे हैं। ऑक्सिजन सिलिंडर, बेड, ICU बेड, रेमडीसीवीर, अन्य दवाईयों के लिए अपने जानने वाले लोगों को फोन कर रहे हैं, हाथ पैर जोड़ रहे हैं, 50 गुना पैसा खर्च कर रहे हैं। तब या तो कोई व्यवस्था हो रही है, बच रहे हैं या अंतिम यात्रा पर चले जा रहे हैं। मैंने खुद सैकड़ों लोगों की मदद की है। लोग सांसद, मंत्री, कमिश्नर से फोन करवा रहे हैं एक अदना से बेड या इंतजाम के लिए।

इस देश का प्रधानमंत्री चुनावी रैली में लाखों की भीड़ पर खुश हो रहा है जबकि देश में लाखों कोरोना के केस आ रहे थे। एक राज्य का मुख्यमंत्री FIR का ऑर्डर देता है जब कोई उससे ऑक्सिजन सिलिंडर के लिए गिड़गिड़ाता है। एक राज्य का मुख्यमंत्री यह कहते हुवे पाया जाता है कि जो मर गए उनको वापस नहीं ला सकते, आप मुझे और सरकार को दोष मत दीजिये। एक राज्य का मुख्यमंत्री अपने आवास से 84 दिन तक नहीं निकलता है।

इसी देश में दिहाड़ी मजदूर हजारों किलोमीटर पैदल चलते हैं, कुछ रास्ते मे ही मर जाते हैं। लेकिन फिर चुनाव होता है और उनको चुनते हैं, जिनसे उन्हें नफरत होनी चाहिए। इन सबके बावजूद नेताओं के समर्थक इनका फेलियर मानने को तैयार नहीं। उल्टा उनका जयगान करने को तैयार हैं। जब न्यूज़ीलैंड का दूतावास अपनी जान की भीख मांगता है उस युवा नेता से जिसको कोई संविधानिक पद नहीं मिला है।

मेरा यह मानना है कि भारत के लोगों से ज्यादा क्षमा युक्त पूरी दुनिया का कोई समाज नहीं हो सकता। यहां गली गली में लाशों  का ढेर लग जायेगा। लेकिन,फिर भी जब समय थोड़ा करवट लेगा, कुछ उजाला होगा, ये पुनः इन्ही नेताओ का जयगान करेंगे। और सोने की थाली में इनका चरण वंदन करेंगे।

भारत में कोई सिविल वॉर नहीं हो सकता, कोई सामाजिक क्रांति नहीं हो सकती। हमारा सहनशील होना ही राजनीतिक वर्ग का सुरक्षा कवच है। यही उनका बुलेट प्रूफ जैकेट है। हां, यहां सामाजिक, राजनीतिक, या पॉलिसी फेल होने से करोड़ों हत्यायें हो सकती हैं।

इसका जिम्मेदार कौन है? मुझे लगता है केवल और केवल आप हैं!

http://www.arunbharti.wordpress.com

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