नाज़ुक मन

ऐसे तो वक़्त कटता नहीं,
लेकिन मन बहला लेता हूँ।

तुम जाती हो जब कहीं दूर,
कई तरह का खाना बना लेता हूँ।

इस बार पांच दिन में पांच सब्जी बनाया,
बैगन भर्ता, मिक्स वेग, एग करी,आलू टमाटर,
और कढ़ाई पनीर में समय गंवाया ।

लोग कहते हैं कि बीबी मायके गयी है,
बढ़िया है, बैचलर लाइफ एन्जॉय करो।

उन्हें क्या बताऊँ, की उसके बिना तो,
नींद और सांस दोनों में तक़लीफ़ होती है।

मेरी कविता व्यावहारिक है,
और प्यार अनोखा ताजा है।

तुमसे कहता हूँ जल्दी आओ,
नाजुक मन का तकाजा है !

©अरुण भारती

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