अपनों से प्यार

अपनों से प्यार !
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जब आप किसी से बहुत प्यार करते हैं,
उनकी सुरक्षा और रखवाली करते हैं,
इतना कि अपना सर्वश्व न्योक्षावर करने से पहले,
एक पल ले लिए भी डगमग नहीं होते,
तो उनकी आवाज, आपको पुकारती आवाज,
अक्सर सुनाई देती है, नितांत सन्नाटे में भी।

मुझे मेरे कबीर की आवाज,
रुचि की आवाज,
मेरे बाबूजी और माँ की आवाज,
मेरे छोटे भाई बहनों की आवाज,
अक्सर ऐसे ही सुनाई देती है!

फिर ध्यान से देखता हूँ!
तो या तो सुनसान,
या कोई और इंसान होता है!

: अरुण भारती

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