एक छोटी सी चुहिया
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मेरे घर में एक छोटा सा चूहा या चुहिया है। चुहिया मान रहा हूँ, क्योंकि बहुत चालाक है। उसको पकड़ने और मारने का सारा जतन कर चुके हैं। जहर दिया खाती नहीं। पिंजड़ा लगाया पकड़ में आती नहीं। सारे दरवाजे खोल दिये, लेकिन भागती नहीं। कई बार पैर से कुचलने की कोशिश की, लेकिन बच जाती है। इतना डर लगता है कि पता नहीं क्या काट दी। डिग्री काट दी तो सड़क पर आ जाऊँगा। डिग्री कितनी मेहनत से मिलती है। कई बार तो पूरी ताकत लगानी पड़ती है अपनी डिग्री छुपाने में। अपने प्रधानमंत्री से पूछिये।
साम, दाम, दंड, भेद सब लगा चुके हैं। लगता है अब शाह जी को बताना पड़ेगा। पान सुपारी सब दे देता हूँ। जो एक जज से निपट सकता है उसके लिये चुहिया क्या चीज़ है। ये भी पता लग गया, हम कितने वीर हैं। एक चुहिया तो मारी नहीं जाती।
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