मोदी और मीडिया

जिस तरह का जोश-जूनून है मोदी के लिए वो देखने लायक है. एक ज़माना था जब बाजपेयी जी बहुत प्रसिद्ध हुआ करते थे . पक्ष-विपक्ष सबसे बराबर सम्मान मिलता था.बीजेपी के एकलौते ऐसे नेता थे जो मुझे आजतक पसंद हैं. इंदिरा गांधी ने अपने खून का आखरी बून्द भी देश के लिए दिया. ये उन्होंने कहा था.उनकी गज़ब की प्रसिद्धि थी. राजीव गांधी ने भी अपना बलिदान ही दिया. वजह जो भी हो, व्यक्तिगत कारणों से उन्हें नहीं मारा गया.मुझे याद है जब उनको बम से उड़ाया गया तो मेरे पापा लगभग रो पड़े थे.उन्होंने उस दिन ठीक से खाना भी नहीं खाया।
आज की दीवानगी का कारण सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जबरदस्त बाज़ारीकरण है. रियलिटी शो जैसा चलने की होड़ है. इसमें कई बार एक बेकार सी, ना अहमियत वाली न्यूज़ भी दिन भर-रात भर ब्रेकिंग न्यूज़ बनी रहती है. जबकि उस समय तो केवल रेडियो था ज्यादातर के पास. उस समय यदि ये सब होता तो नेहरू, इंदिरा और राजीव के लिए दीवानगी देखने लायक होती।
यह गला फाड़-फाड़ कर बताया जा रहा है की कांग्रेस ने केवल बर्बाद किया है,लूटा है. मैं नहीं मानता। मेरे गावं और उसके आस पास के सब गरीब गुरबा का घर इंदिरा आवास से बना है. मैं IIT Kharagpur से पढ़ा हूँ जो नेहरू का सपना था. मैं JNV Gopalganj से पढ़ा हूँ, जो राजीव जी का सपना था.
एक वाक्या है. जब राजीव के मन में नवोदय का प्लान आया तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री को देर शाम को या रात को बुलाया और कहा की इसे लागु करो. बस 5 मिनट में गावं के 75% छात्रों का भविष्य अच्छा करने का फरमान जारी हो गया. उस सपने की एक उपज, ये लिख रहा है. मेरे गावं और वहां के आसपास का रोड भी चकाचक है. वो भी इनकी ही देन है शायद !
आजकल मेरे बिजली का बिल आधा आता है. पानी का बिल तो आता ही नही. बहुत कुछ बदल गया है. पिछले सालोँ में दिल्ली फ्लाईओवर से पट गया है. यहाँ का विवेक विहार चकाचक है. पता चला ये शीला ताई की देन है.
कहने का मतलब ये हैं की, कुछ लोग होते हैं जो कुछ ऐसा करते हैं, जो डायरेक्टली आपको टच करता है. आप उसके मुरीद कैसे नहीं होंगे. ऐसी ही कुछ भविष्य में उम्मीद है जो मुझे जीने के बेहतर और आसान तरीके दे. ताकि मन खुश और सीना चौड़ा हो जाये।
खैर ! काश फेसबुक, ट्विटर और कानफोड़ू मीडिया उनके ज़माने में होती, तो दीवानगी की एक दो और फिल्म देखने में बड़ा मजा आता !

Copyright@ Arun Bharti

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