मेरे मन में रावण बसते, बसते मन में राम हैं.
अक्सर दोनों लड़ते रहते,लड़ना इनका काम है.
राम जी जब हारते हैं,मन में क्रंदन होता है.
रावण जब भी हारता,घनघोर गर्जन होता है.
अक्सर दोनों लड़ते रहते,लड़ना इनका काम है.
राम जी जब हारते हैं,मन में क्रंदन होता है.
रावण जब भी हारता,घनघोर गर्जन होता है.
मेरा मन निर्झर की भाती,अबाध गति से चलता है.
रामजी धक्का खाते रहते,रावण मंद मंद हँसता है.
हर तरफ रावण ही रावण,राम जी अल्पसंख्यक हैं.
राम जी हारे रावण जीते, ये संकट का सूचक है.
रावण का अट्टहास देख कर, चिंतित जी घबराते हैं.
इस विजय दिवस पर लो भैया, मन में भी आग लगाते हैं.
—————— अरुण भारती ‘चिंतित’
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