रिश्तों में फासला

रिश्तों में फासला
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कभी कहीं जाने अनजाने में,
छोटी छोटी बातों पर,
हम इतने दूर हो जाते हैं की,
फिर पास आना मुश्किल हो जाता है.

वो सोचते हैं हम कदम बढ़ाये,
हम सोचते हैं वो कदम बढ़ाये,
इसी होड़ में रिश्तों में,
फासला बढ़ता जाता है.

जहाँ ये तय था की शरीक होंगे,
हर पलों के गुजरने में,
बहुत सा हसीं लम्हा अन्छुवा रह जाता है.

ऐसे गुरुर से क्या फायदा,
ऐसी गुस्ताखी से क्या गिला,
जब अगले पल हमारा या तुम्हारा वजूद,
साबित और सुरक्षित रहेगा,
इसका कोई निश्चित नहीं पता.

By: Holy~Devil

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