बड़ी ही सतर्कता और सफाई से ,
समूचा ही जला देना.
एक कतरा भी मिला उस साक्ष्य का,
जिसमें लिखे हैं हमारे अनमोल अन्तरंग लम्हें,
पेश कर दूंगा भरी महफ़िल में,
और तुम्हारे रेशमी से गाल पे दरार आएगी गुलाबी ,
चेहरे की रंगत यूँ उड़ेगी,
जैसे पखेरू प्राण.
समय की छाती पर जो निशानी छोड़ते हम ,
जब ओ बनकर साक्ष्य आती,
सरहदों में दरारे पड़ जाती है ,
इंसानियत हैरान होती है ,
तुम्हारा कृत्रिम चेहरे का रंग रोगन,
क्या फिर साक्ष्य को झेल पायेगा ??
फिर भी तुम कोशिश करना उनको मिटाने की,
चाँद ने पखवाड़े बदले हमने देखे साथ साथ ,
तारो की श्रृंखलाएं अपना गणित बदल कर कई आकार ली,
हमने देखे साथ साथ ,
मेरे रोम रोम कितने अरमान से अंगडाई लिए ,
ओ तुम्हारी भीनी सी छुवन का असर था.
कैसे मिटावोगी इतने साक्ष्य तुम,
कैसे बचोगी अपनी लालिमा के बिखरने पे,
फिर भी कोशिश करना सतर्कता से.
(Holy~Devil) 4th MAY 2010
bahoot khoob bharti ji …sakshya nahi mitenge.
LikeLike
Bahuton ka naam aayega. Kis kis ka loon main.
Bas yahi kahta hoon.
आभारी हूँ मैं उन सबका
दे गए व्यथा का जो प्रसाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद ।
LikeLike
Hmmm… Kiske liye likha hai? Koun hai wo?
Jaldi batao! 🙂
LikeLike
I have never seen you so short in words.only
you know the reason.
LikeLike
dhansu katilana mood 😛
LikeLike