Mood Swings in “poetry”

Coping with this fast paced corporate life has been very difficult  for me since June 2008 . That is the month when i joined my first company as an associate. This job life is taking toll on my creative abilities. I have reduced myself from writing long poems to these few liners. They represent my mood swing and emotion. So is the title of this article.
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हर कदम पर मौत की जिंदगी से लडाई है
परन्तु, जिंदगी ने जूझने की हिम्मत पाई है
अरमानो का न गल जाने दो फिसलन के डर से
असमान का कहो ऊँचा हो ले बाधाएं हटे डगर से

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उन कोमल सांसों की बिछुड़न,  उन चंचल नयनों का हसना
उन महके गेसुओं का सावन, बलखाती कटी का लचकना
भूल न पाऊं फिर भी, जीने की एक हसरत दे भगवन…
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क्यूँ विचलित कर जाती हो , जब एकाग्रचित हो मैं स्वप्न बुनता
प्रेम-पथिक बन जाने का या जग को सुखद बनाने का ,
इस भंवर जल में तुमको ढूंढ़ता या फिर जग की तृष्णा को !
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इन अखियों के असुवन में, मेरे घर की बगिया सींच गयी .
हे शीतल बयार जरा उनको बता, मेरे इश्क में इतनी तरावट है !
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हम इश्क से महरूम भी न रहे , हम इश्क से महफूज़ भी न रहे
इस नाचीज़ की पारो भी देहरी लाँघ कर आई थी कभी
मेरी सभ्यता की बेबसी को भांप ओ चली गयी
अब इस मजबूर को चंद्रमुखी की तलाश है !
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प्यार मुझको फूल से भी , प्यार मुझको शूल से भी /
फूल से अभिसार हो रहा, शूल से तकरार है /
एक फूल है आज देखी, उससे भी आँखें चार हैं /
कौन जाने , लोग कह दें , कैसा ये व्याभिचार है ?
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मुझे क्या पता था ?
गजल तो जुल्फें सवारतीं हैं ,
तराने तो धड़कन गुनगुनाती हैं
अफसाने तो नैनो की भूलभुलैया में बुनते हैं
मकड़ी के जाले से भी उलझे से
पर राधा कृष्ण के प्रेम से सुलझे से !
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Cheers,

Holy~Devil

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