राहुल बाबू कैसे हैं आप ?
ठीक हूँ भाभी मैने कहा
नही तो आपकी आँखें तो झूठ कह रही हैं ?भाभी ने कहा
मेरी आँखों में आँसू भर आए.भाभी मेरे बगल में बैठ गयी
र्शमी की याद आ रही है ना?हाँ भाभी उसके बिना सायद मैं जी ना पाऊं….मैने कहा.
एसा नही कहते पगले..भाभी बोली.
मेरी प्रंपरिया र्शमी के बाद भाभी ही मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं.
उनसे आजतक कोई भी बात छ्छूपाई नही है
ओ बहुत प्यारी हैं मगर जब मुझे आप बोलती हैं तो छीड़ सी होती है मुझे.मैं घर में सबसे बड़ा हू.ओ पड़ोस की भाभी हैं तब भी मेरे रश्मी के ओर इनके तार जुड़े हुए हैं के इस पैर मेरा घर उस पैर भाभी का ओर उसके बगल में एक सफ़ेद मंज़िला इमारत है जहाँ मेरी रश्मी का जन्म हुआ था.
प्यारे से गुड्डे गुड़िया की तरह थे जब मेरी मा ओर पिनकी हम दोनो को साथ पलंग पैर लीटा देती.लोग कहते वाह क्या प्यारी जोड़ी है !!!
यह जोड़ी बदी हुई ओर सचूल जाने लगी का हैर पाठ हमने साथ में पढ़ा ओर गहरी दोस्ती का भी.
फिर समय ने करवत बदली.मैं पटना एक अवसूया विदयालया में आ गया.वह वही पढ़ने लगी.हम निम्न मध्यमवर्गिया परिवार से हैं सो लड़कियों को दूर पढ़ने नही भेजा जाता है मैं वापस लौटा तो ओ नकचड़ी लड़ाकू अब गयी थी.मैं भी पढ़कू ओर गंभीर गया था सो खुल कर बात करना बंद गया था.
काई बार हमारी आँखे चार हुई.मैं मुस्कुराया ओ भी मुस्कुराई प्र मुह से हम एक लफ्ज़ भी नही कह सके.
वह कपड़े सूखने या किसी बहाने छत पैर आ जाती और मुझे तिरचही नज़र से देखते हुए मुस्कुरा देती ओर शर्मा कर मेरे दिल में एक हलचल सी मचा देती.गवन में लड़कियाँ बदी जाती है तो उनसे मीलना काम जाता है पीनकी आंती से बाते करता बस उसे देख भर पाता था.
उस दिन तो ग़ज़ब ही गया.मैं बरामदे में बैठा था ओ अपने घर के दरवाज़े पैर खड़ी मुझे देख रही थी.पता नही क्या सोचकर मैने उसकी तरफ़ kiss उछाहली उसने भी kiss kiya और सरमती हुई अंदर चली गयी उस रात मुझे नींद नही आई.करवत बदलते बदलते रात भर कुच्छ सोचता रहा.सुबह जल्दी जगा.एक तस्वीर निकली जिसमीएन एक लड़का एक लड़की को kiss कर रहा था .एक love letter भी लिखा ओर ले कर पूजा भाभी के पास गया.
आरे राहुल बाबू आप ओर इतनी सुबह कोई ख़ास बात है क्या ??स्वाभाविक प्रस्न था ,क्यंकि मैं उनके घर बहुत ही क्म जाता था.
“जी भाभी,मुझे आपसे अकेले में कुच्छ बात करनी है मैने कहा.
“ओ तब तो ज़रूर कोई ख़ास बात है ” !!!
भाभी मैं र्शमी को बहुत चाहता हूँ क्या आप उसे ये letter दे देंगी ?? मैने सीधा सपाट कहा.
“ओ तो यह खिचड़ी पाक रही है तभी मैं सोची की ये MR. पढ़कू इतना खुस क्यों नज़र आते हैं !!!
क्ब से चल रहा है ये सब ??
“जी बचपन से ” मैने कहा.
“चुप बुढ़ु कहीं का,एसा भी कहीं होता है क्या “भाभी ने हस्ते हुए कहा.
“वैसे मुझपे इतना भरोसा क्यों ??? मैं आपकी मा को भी तो ब्टा सकती हूँ.
“पता नही क्यों ? लेकिन मुझे आपपे भरोसा है भाभी की तरफ़ देखा.उनकी आँखें मौन स्वीकृति दे रही थी.
ख़ैर यही से हमारे पत्रो का सीलसीला सुरू गया.हम दोनो छत पैर बैठ कर आँखो से दिल की बातें किया करते जिनका आईना हमारे पत्र बनते क्यी बार हम मिलते प्र दिल की बातें दिल में ही रह जाती.यह सिलसिला चार साल तक चला फ़ीर मैं IIT KHRAGPUR आ गया.वह I.Sc complete क्र कढ़ाई सिलाई सीखने लगी.
आख़िर कब तक चलता ये सिलसिला कभी ना कभी तो इसे टूटना ही था.मेरा IIT में 2nd yr. पूरा हुआ.गर्मी की छुट्टी में घर पहुँचा. हमेशा की तरह अपनी जान के दर्शन किया लेकिन उसके चेहरे पैर मैने गंभीरता की झलक देखी.अगले दिन भाभी के घर पहुँच तो रश्मी वहाँ पहले से ही बैठी थी.
“भाभी’ रश्मी यहाँ पहले से ही बैठी है मैं भी यहाँ बैठुंगा तो लोग तरह तरह की बाते कहेंगे.भाभी कुछ बोलती इससे पहले रश्मी ही बोल उठी.
“इतना डरते तो प्यार क्यों किया ??मैं चुप रहा.
भाभी बोली” ये आपका ही इंतज़ार कर रही थी आपसे मिलना चाहती है
“आप तो जानती हैं इस तरह मिलने से हम तीनो ही बदनाम जाएँगे ” मैने कहा.
ख़ैर तय हुआ की आगली रात को एक बजे मिलना है रात भर सो नही सका.उसके सबदों ओर आँखों की अधीरता मुझे बेचैन कर रही थी.
निर्धारित समय पैर मैं और वो मेरे घर के पिच्छे वाले कमरे में मीले.मेरा दिल धड़ धड़ कर रहा था.
“रश्मी..कैसी हो ?? मेरे मुह से पहला लफ्ज़ नीकला.
“बड़ी चिता है तुम्हे मेरी “वह रुआंसी होकर बोली.
“बोलो,क्या बात है ??? मैने कहा.
“तुम्हे कुच्छ पता भी है की मेरी शादी होने वाली है और तुम पूछते हो की क्या बात है ??तुम्हारे सिवा मैं किसी ओर के बारे में सोच भी नही सकती.राहुल मुझसे शादी कर लो.मैं तुम्हारे बिना जी नही पाऊगी.बोलते बोलते उसकी आँखों में आँसू भर आए.
मैं अवाक रह गया.
“रश्मी मैने भी तुम्हारे बिना जी नही सकता.लेकिन टुमए दो साल इंतज़ार करना पड़ेगा.हम अगर अभी शादी कर लेंगे तो सयदा किसी लायक नही रहेंगे.” मैं बोलता ही चला गया.
“राहुल, मैं किसी की परवाह नही करती हम लोग घर से भाग चलते हैं तो मैं म्र जौंगी.
“रश्मी, मुझे समझने की कोसिस करो अभी मैं कुछ नही कर सकता.नवंबेर में आऊंगा तब बात करेंगे इस प्र.
“मेरी धड़काने बढ़ गयी और आँखे न्म थी.”
“राहुल”…मेरे कंठ अवरुद्ध हो गाये और ओ मेरे गले लग्कर रोने लगी रगो में उफान आ गया.फिर हम दोनो अस्त व्यस्त हो ग्ये.फिर ओ हो गया जो होना नही चाहिए था और पूरी रात जैसे कुछ ही पलों में बीत गयी की चहचाहाठ ने हमीएन अपने अपने घरों की तरफ़ जाएँ को सावधान किया.
फिर वही लुका छिपी का खेल चलता रहा.छुट्टी बीती और मैं IIT आ गया.लेकिन मेरा मन यहाँ नही लगा.उसकी एक एक बात मुझे हतोड़े की तरह चोट कर रही थी.मियाने सोचा वह ज़्यादा भावुक है ठीक हो जाएगी. मुझे लगा की पलक झपकते ही घर पहुँच जाऊं.घर पहुँचा तो देखा उसके घर में शादी की तैयारियाँ जोरो प्र थी.
बस दो दिन बाद शादी थी.मैं सोच में पद गया.भाभी ने किसी तरह मुलाक़ात कराई.उसकी आँखे रोते रोते सूज़ गयी थी.
“रश्मी”..क्या हाल बना रखा है मेरी जान ..???मैं भी रूवन्सा हो गया.
“तुम नही समझोगे”..उसने बस इतना ही कहा और ऐसे देखा जैसे मेरी गहराई जान गयी हो….
पता नही क्यों मैं उसके गले लग्कर रोने लगा….
उसे लगा मैं बहुत असहाय हूँ.
और मेरी जान ने मुझे ऐसा सहर दिया जिसे मैं जन्म जन्म तक नही भूल पाऊँगा.
suicide note में लिखा था
“राहुल,तुमने मुझे प्यार करना सिखाया प्र नीभा ना सके.तुम कहीं ना कहीं कमज़ोर हो.बस तुम मुझे
छू सकते थे.
आशा करती हूँ की हम ह्र जन्म में दो शरीर एक जान रहेंगे.
तुम्हारी
(जान)
“हाँ जान मैं तुम्हारा हूँ और हमेशा ही तुम्हारा रहूँगा….”मैं बेजार होकर रोने लगा.
उसकी चिता से उठता धुआ मेरे मन के अंदर भी भर रहा था.
मेरा दिल भी उसमें समा गया.
“आह मेरी जान चली गयी और हम देखते ही रह ग्ये..!!!
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why is this scary to you ?
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scary..
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